इनमें 648 अस्पतालों का डी-इम्पैनलमेंट किया गया, जबकि 61 अस्पतालों को आयुष्मान योजना से निलंबित किया गया। इसके अलावा 17 अस्पतालों की विशेषता का डी-इम्पैनलमेंट किया गया है। वहीं 140 अस्पतालों पर कुल 8.53 करोड़ रुपये से ज्यादा की पेनाल्टी लगाई गई, जिसमें अब तक 4.37 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली हो चुकी है।
2026 में 318 अस्पतालों पर कार्रवाई
साचीज की CEO अर्चना वर्मा के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने को लेकर गंभीर हैं। इसी के तहत 2026 में अब तक 318 अस्पतालों पर कार्रवाई की गई है।
इनमें 242 अस्पतालों को भारत सरकार के 35 इंडीकेटर्स पूरा नहीं करने पर डी-इम्पैनलमेंट किया गया, जबकि 61 अस्पतालों को निलंबित किया गया। 15 अस्पतालों की स्पेशियलिटी का भी डी-इम्पैनलमेंट किया गया है।
इससे पहले 2025 में 16 अस्पतालों पर कार्रवाई हुई थी। इनमें 14 अस्पतालों का डी-इम्पैनलमेंट और दो अस्पतालों की स्पेशियलिटी का डी-इम्पैनलमेंट किया गया।
140 अस्पतालों पर 8.53 करोड़ की पेनाल्टी
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 60 अस्पतालों पर 3.45 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाई गई, जिसमें से 3.19 करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली हो चुकी है।
वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 80 अस्पतालों पर 5.07 करोड़ रुपये की पेनाल्टी लगाई गई है। इनमें से 1.17 करोड़ रुपये से ज्यादा की वसूली की जा चुकी है।
दोनों वित्तीय वर्षों को मिलाकर 140 अस्पतालों पर 8.53 करोड़ रुपये से अधिक की पेनाल्टी लगाई गई और 4.37 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि वसूल की जा चुकी है।
डेटा एनालिटिक्स से पकड़ी जा रही गड़बड़ी
साचीज की स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट डाटा एनालिटिक्स के जरिए अस्पतालों में होने वाली गड़बड़ियों को चिन्हित कर रही है। इनमें आयुष्मान मरीजों के इलाज में लापरवाही, निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करना, एक ही मरीज को बार-बार भर्ती करना, एक जैसी रिपोर्ट भेजना और OPD मरीज को IPD में भर्ती दिखाना जैसे मामले शामिल हैं।
जांच में गड़बड़ी मिलने के बाद संबंधित अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पेनाल्टी के बाद भी यदि अस्पताल निर्धारित मानकों को पूरा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जाएगी।
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