सरकार ने दवा कंपनियों को इन दवाओं के पैकेट, अंदर दी जाने वाली जानकारी और प्रचार सामग्री पर साफ चेतावनी लिखने का आदेश दिया है, ताकि छोटे बच्चों को इनके इस्तेमाल से होने वाले संभावित खतरे से बचाया जा सके। दवा के पैकेट पर स्पष्ट रूप से लिखना होगा कि चार साल से कम उम्र के बच्चों में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
सरकार ने एक्सपर्ट कमेटी और ड्रग्स टेक्नीकल एडवाइजरी बोर्ड यानी DTAB की सिफारिश के बाद यह फैसला लिया है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस दवा कॉम्बिनेशन से छोटे बच्चों में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम हो सकते हैं, जबकि इस उम्र के बच्चों के लिए सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं।
क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलेफ्राइन हाइड्रोक्लोराइड का कॉम्बिनेशन आमतौर पर सर्दी-जुकाम और नाक बंद होने के बाद दी जाने वाली दवाओं में इस्तेमाल होता है।
15 अप्रैल 2025 की अधिसूचना में कुछ फिक्स्ड डोज कॉम्बिनेशन यानी FDC दवाओं पर इस तरह की चेतावनी लगाई गई थी। अब इसका दायरा बढ़ा दिया गया है। इन दोनों दवाओं को मिलाकर बनी सभी FDC दवाएं चार साल से कम उम्र के बच्चों को नहीं दी जा सकेंगी।
सरकार ने यह आदेश ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 की धारा 26A के तहत जारी किया है। FDC ऐसी दवा होती है, जिसमें दो या उससे ज्यादा सक्रिय दवा घटक एक ही दवा में निश्चित मात्रा में मिलाए जाते हैं।
इससे पहले 3 अक्टूबर 2025 को केंद्र सरकार ने दो साल से छोटे बच्चों को कफ सिरप देने पर रोक लगाने की बात कही थी। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने खांसी और सर्दी की दवाओं को लेकर एडवाइजरी जारी की थी।
सरकार ने मध्य प्रदेश और राजस्थान में कफ सिरप से 11 बच्चों की मौत की खबरों के बाद यह एडवाइजरी जारी की थी। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, आमतौर पर पांच साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं दिया जाना चाहिए। इससे बड़े बच्चों को यदि कफ सिरप दिया जाए तो उसका इस्तेमाल सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए।
सरकार के नए आदेश का उद्देश्य छोटे बच्चों में इन दवाओं के इस्तेमाल से जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना और अभिभावकों को स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है।
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