न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और रजनीश कुमार गुप्ता की पीठ ने दोनों नगर निकायों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के एक-एक वार्ड में नसबंदी एवं टीकाकरण शिविर आयोजित करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि यह अभियान एक प्रायोगिक परियोजना के रूप में चलाया जाएगा।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि शिविर से पहले व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और क्षेत्र में सूचना-पट्ट लगाए जाएं, ताकि लोगों को स्पष्ट रूप से बताया जा सके कि आवारा कुत्तों को कहीं भेजने या हटाने के लिए नहीं, बल्कि केवल नसबंदी और टीकाकरण के लिए लाया जा रहा है।
सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि आवारा कुत्तों की आबादी पूरी तरह खत्म न हो और कुल आबादी का कम से कम पांच प्रतिशत सुरक्षित बना रहे।
यह मामला उच्च न्यायालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के आधार पर स्वतः संज्ञान लेकर शुरू किया गया था। सुनवाई के दौरान एमसीडी की ओर से अदालत को बताया गया कि राजधानी में लगभग आठ लाख आवारा कुत्ते होने का अनुमान है, हालांकि इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
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