RBI ने 10 और 20 रुपए के 100-100 करोड़ पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल का प्रस्ताव दिया था। अगर ट्रायल सफल रहता है तो इन दोनों मूल्यवर्ग के पॉलीमर नोट नियमित रूप से जारी किए जा सकते हैं। खास बात यह है कि पॉलीमर नोट आने के बाद पुराने कागजी नोट बंद नहीं होंगे। RBI के मुताबिक दोनों तरह के नोट बाजार में एक साथ चलते रहेंगे और बदलाव धीरे-धीरे किया जाएगा।
पॉलीमर नोट कागज के बजाय खास तरह के प्लास्टिक मटेरियल यानी पॉलीमर सब्सट्रेट पर बनाए जाते हैं। ये सामान्य नोटों की तरह हल्के होते हैं, लेकिन पानी में भीगने, धूल और गंदगी से जल्दी खराब नहीं होते और आसानी से फटते भी नहीं हैं। यही वजह है कि इनकी उम्र कागजी नोटों की तुलना में ज्यादा होती है।
इन नोटों का एक बड़ा फायदा यह है कि इनमें एडवांस सिक्योरिटी फीचर्स आसानी से जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा कागजी नोट जल्दी खराब होते हैं और उन्हें बार-बार बदलना पड़ता है। पॉलीमर नोट ज्यादा समय तक चलेंगे, इसलिए लंबे समय में नोटों की छपाई और उन्हें बदलने पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है। FY25 में RBI ने कागजी नोटों की छपाई पर 6,372.8 करोड़ रुपए खर्च किए थे।
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के मुताबिक ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे कई देशों में पॉलीमर नोट 30 साल से ज्यादा समय से सफलतापूर्वक इस्तेमाल किए जा रहे हैं। दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में पॉलीमर बैंकनोट चलन में हैं।
भारत में पॉलीमर नोट लाने का प्रयास पहली बार 2012 में किया गया था। उस समय नोटों की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए पॉलीमर नोटों पर काम शुरू हुआ था, लेकिन तकनीकी कारणों से यह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सका। मई-जून में एक बार फिर पॉलीमर नोटों को लेकर चर्चा तेज हुई और RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भी बताया था कि इसके फायदे और नुकसान का मूल्यांकन किया जा रहा है।
अब सरकार की मंजूरी के बाद 10 और 20 रुपए के पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल होगा। ट्रायल के दौरान यह देखा जाएगा कि ये नोट भारतीय परिस्थितियों में कितने टिकाऊ और उपयोगी साबित होते हैं। सफल रहने पर भविष्य में छोटे मूल्यवर्ग के नोटों में पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है।
हालांकि, इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि भारत में कागजी करेंसी खत्म होने वाली है। पुराने कागजी नोट पहले की तरह चलते रहेंगे और पॉलीमर नोट उनके साथ ही इस्तेमाल किए जाएंगे।
भारत में इससे पहले भी करेंसी को लेकर बड़े बदलाव हो चुके हैं। जनवरी 1946 में ब्रिटिश सरकार ने 500, 1,000 और 10,000 रुपए के बड़े नोट बंद किए थे। बाद में 1954 में 1,000, 5,000 और 10,000 रुपए के नोट फिर से जारी किए गए।
जनवरी 1978 में मोरारजी देसाई सरकार ने 1,000, 5,000 और 10,000 रुपए के नोट बंद किए। इसके बाद 8 नवंबर 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 और 1,000 रुपए के पुराने नोटों को अमान्य घोषित किया। इनकी जगह नया 500 रुपए का नोट और 2,000 रुपए का नोट जारी किया गया।
19 मई 2023 को RBI ने क्लीन नोट पॉलिसी के तहत 2,000 रुपए के नोट को चलन से वापस लेने का ऐलान किया। हालांकि इसे नोटबंदी नहीं कहा गया, क्योंकि लोगों को अपने 2,000 रुपए के नोट बैंक में जमा करने या बदलने के लिए समय दिया गया था।
अब 10 और 20 रुपए के पॉलीमर नोटों का फील्ड ट्रायल भारतीय करेंसी में एक नई शुरुआत की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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