मंदिर केवल पूजा स्थल के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और सामुदायिक केंद्र के रूप में भी काम करेगा। यहां भारतीय संस्कृति, कला और परंपराओं से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उद्घाटन और उत्सव में भारतीय मूल के लोगों के साथ हिंदू समुदाय और भारतीय संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के शामिल होने की उम्मीद है।
भारत में तराशे गए पत्थरों से बना मंदिर
पेरिस के पास बने BAPS स्वामीनारायण मंदिर में भारत से लाए गए खास पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। इन्हें भारत में करीब 1,000 साल पुरानी नक्काशी की तकनीकों से तैयार किया गया है। मंदिर के कई हिस्सों पर कारीगरों ने हाथ से बारीक नक्काशी की है।
भारत में तैयार किए गए इन पत्थरों को फ्रांस लाकर मंदिर में लगाया गया। इस काम में भारतीय कारीगरों के साथ फ्रांस के विशेषज्ञ भी शामिल रहे। इनमें नोट्रे-डाम कैथेड्रल की मरम्मत से जुड़े कारीगर भी शामिल थे।
मंदिर की संरचना में गुंबद, स्तंभ और शिखर जैसी पारंपरिक हिंदू वास्तुकला को शामिल किया गया है। इस तरह मंदिर में भारतीय शिल्पकला और फ्रांस की आधुनिक निर्माण तकनीक का मेल देखने को मिलता है।
1970 में आया था मंदिर बनाने का आइडिया
BAPS पेरिस की वेबसाइट के मुताबिक, फ्रांस में हिंदू मंदिर बनाने का विचार 1970 में आया था। करीब 25 साल बाद 1995 में पेरिस में मंदिर बनाने की योजना पर काम आगे बढ़ा।
2017 में बुसी-सेंट-जॉर्जेस में मंदिर के लिए जमीन मिली। इसके बाद 2021 में निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी। करीब 56 साल बाद अब 2026 में मंदिर बनकर तैयार हुआ है।
BAPS ने दुनिया में बनाए 1,300 से ज्यादा मंदिर
बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था यानी BAPS स्वामीनारायण परंपरा से जुड़ी एक वैश्विक हिंदू संस्था है। संस्था धार्मिक गतिविधियों के साथ शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक सेवा से भी जुड़ी है।
BAPS के मंदिर भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और यूरोप के कई देशों में हैं। यहां पूजा और धार्मिक कार्यक्रमों के साथ भारतीय संस्कृति, भाषा, संगीत, कला और बच्चों से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।
BAPS के मुताबिक, दुनिया भर में उसके 1,300 से ज्यादा मंदिर हैं और इसका नेटवर्क 50 से ज्यादा देशों में फैला है। पेरिस के पास बना BAPS स्वामीनारायण मंदिर भी इसी वैश्विक नेटवर्क का हिस्सा है।
भारत में अक्षरधाम भी BAPS ने बनाया
BAPS के बनाए प्रमुख मंदिरों में दिल्ली का स्वामीनारायण अक्षरधाम भी शामिल है। इसके अलावा गुजरात के गांधीनगर में भी अक्षरधाम परिसर है।
दिल्ली का अक्षरधाम पारंपरिक भारतीय शैली में बनाया गया है। इसे बनाने में हजारों कारीगरों और स्वयंसेवकों ने काम किया था। BAPS के मुताबिक, मंदिर को पारंपरिक वास्तु और शिल्प परंपराओं के अनुसार तैयार किया गया है।
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