साइबर कानून और डेटा गवर्नेंस के विशेषज्ञ एवं MeitY के पूर्व वरिष्ठ निदेशक और ग्रुप कोऑर्डिनेटर रमेश माहेश्वरी के मुताबिक, इंटरनेट तक लोगों की पहुंच बढ़ने और डिजिटल दुनिया में बढ़ती निर्भरता के कारण साइबर सिक्योरिटी घटनाओं में इजाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में AI के विकास ने एक तरफ साइबर खतरों को अंजाम देने की क्षमता बढ़ाई है, तो दूसरी तरफ साइबर घटनाओं का पता लगाने की क्षमता भी बेहतर हुई है।
विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते डिजिटल माहौल में साइबर खतरों से निपटने के लिए लगातार सतर्क रहने की जरूरत है। इसके लिए सिस्टम और तकनीक को समय-समय पर अपग्रेड करना, नए सिक्योरिटी पैच लागू करना और किसी भी कमजोरी का जल्द पता लगाकर उसे ठीक करना जरूरी है।
साइबर सुरक्षा घटनाओं से निपटने वाली भारत सरकार की एजेंसी CERT-In ने भी संगठनों के लिए साइबर सुरक्षा से जुड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। विशेषज्ञ के मुताबिक, AI से जुड़े खतरों के कारण सामने आने वाली कमजोरियों को तेजी से दूर करना जरूरी है और संबंधित सिस्टम को समय पर अपडेट किया जाना चाहिए।
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में 2025 के दौरान कुल 29,44,248 साइबर सिक्योरिटी घटनाएं रिपोर्ट और ट्रैक की गईं। यह संख्या 2023 में दर्ज 15,92,917 घटनाओं के मुकाबले करीब 85 प्रतिशत ज्यादा है।
आंकड़े बताते हैं कि देश में डिजिटल गतिविधियों के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा की चुनौती भी लगातार बड़ी हो रही है। ऐसे में मजबूत सुरक्षा व्यवस्था, समय पर सिस्टम अपडेट और साइबर खतरों की जल्द पहचान आने वाले समय में बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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