पुजारियों, ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ राजा घेपन का स्वागत किया। माता हिडिंबा जाहलमा के पुजारी अनुज ने बताया कि राजा घेपन, माता हिडिंबा और अठारह नाग मनाली पहुंचे हैं और यहां से मलाणा के लिए प्रस्थान करेंगे।
राजा घेपन की यह धार्मिक यात्रा लाहौल के सिस्सू गांव से शुरू होकर ऐतिहासिक मलाणा गांव में पूरी होगी। स्थानीय धार्मिक मान्यता के अनुसार, मलाणा में राजा घेपन अपने बड़े भाई और वहां के प्रमुख देवता जामलू देवता से मिलेंगे।
श्रद्धालुओं के मुताबिक यह यात्रा करीब नौ से दस साल के अंतराल पर होती है और इसका संबंध क्षेत्र की सुख-शांति और अच्छी फसल की कामना से भी है।
यात्रा अगनबल और रूमसू होते हुए चंद्रखानी दर्रे से मलाणा पहुंचेगी। दुर्गम पहाड़ी रास्तों से गुजरने वाली इस यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु देवता के साथ चल रहे हैं।
शनिवार से शुरू हुई यह पारंपरिक तीर्थयात्रा सात दिनों तक चलेगी। मलाणा में राजा घेपन और जामलू देवता के मिलन के साथ इसका प्रमुख धार्मिक पड़ाव पूरा होगा। यह परंपरा हिमाचल प्रदेश के विभिन्न पहाड़ी समुदायों की आस्था और सांस्कृतिक संबंधों को भी दर्शाती है।
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