विशेष रूप से उन कार्मिकों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने अभी तक कोई कोर्स पूरा नहीं किया है या जिनके प्रशिक्षण कोर्स अधूरे हैं। कार्यालयाध्यक्षों को स्वयं भी कोर्स पूरा करने और अपने अधीनस्थ अधिकारियों एवं कर्मचारियों का प्रशिक्षण पूरा कराने की जिम्मेदारी दी गई है।
राज्य शैक्षिक तकनीकी संस्थान (एसआईईटी) के निदेशक एवं मिशन कर्मयोगी के बेसिक शिक्षा के नोडल डॉ. मुकेश चंद्र के अनुसार कार्मिकों की सुविधा के लिए छह कोर्स चयनित किए गए हैं। इनमें स्क्रीन टाइम प्रबंधन एवं डिजिटल जीवनशैली, इंग्लिश वोकैबुलरी, पूर्व प्राथमिक स्तर के लिए प्रभावी शिक्षण विधियां, योगा ब्रेक एट वर्कप्लेस, स्ट्रेस मैनेजमेंट और बेसिक्स ऑफ प्रोजेक्ट मैनेजमेंट शामिल हैं।
इन पाठ्यक्रमों के जरिए कार्मिकों को डिजिटल जीवनशैली, प्रभावी शिक्षण, तनाव प्रबंधन और कार्यस्थल से जुड़ी दक्षताओं को विकसित करने का अवसर मिलेगा। सरकार का उद्देश्य प्रशिक्षण को केवल उच्च कार्यालयों तक सीमित रखने के बजाय विद्यालय स्तर तक पहुंचाना है।
निर्देशों के अनुसार अधूरे प्रशिक्षण को पूरा कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा। कार्यालयाध्यक्ष ऐसे कार्मिकों की निगरानी करेंगे और प्राथमिकता के आधार पर उनके कोर्स पूरे कराएंगे। इससे विभागीय कार्यालयों से लेकर विद्यालयों तक कार्यरत मानव संसाधन को एक साझा क्षमता विकास प्रक्रिया से जोड़ा जा सकेगा।
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि मिशन कर्मयोगी के माध्यम से कार्मिकों को निरंतर सीखने और अपने कार्य-कौशल को विकसित करने का अवसर मिल रहा है। वहीं महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कहा कि प्रत्येक कार्मिक निर्धारित प्रशिक्षण पूरा करे और सीखने की प्रक्रिया को अपने कार्य से जोड़े, यही विभाग का प्रयास है।
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