यूपी के 28 जिलों में कृषि को नई रफ्तार! Google, ITC और AquaBridge संग योगी सरकार का बड़ा करार
(UTTARPRADESH, UTTARPRADESH) मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि Google, Global and Network for Humanity, ITC और AquaBridge के साथ हुए एमओयू उत्तर प्रदेश में कृषि उत्पादकता, किसानों की आय और कृषि के भविष्य को नई दिशा देने का संकल्प हैं। यूपी-एग्रीज परियोजना के तहत किए गए इन समझौतों का उद्देश्य पूर्वी उत्तर प्रदेश के 21 और बुंदेलखंड के 7 जनपदों में कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ अन्नदाताओं की आय में वृद्धि करना है।

मुख्यमंत्री की मौजूदगी में बुधवार को विश्व बैंक वित्तपोषित उत्तर प्रदेश एग्रीकल्चर ग्रोथ एंड रूरल एंटरप्राइज इकोसिस्टम स्ट्रेंथनिंग यानी यूपी-एग्रीज परियोजना के अंतर्गत यूपीडीएएसपी के साथ इन संस्थाओं के एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए।

सीएम योगी ने कहा कि यूपी-एग्रीज प्रदेश की कृषि को प्रोडक्टिविटी से प्रॉस्पैरिटी और फ्यूचर इकॉनमी की ओर ले जाने की महत्वपूर्ण पहल है। इसका उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय, खेती की जलवायु अनुकूलन क्षमता, वैल्यू एडिशन और ग्रामीण उद्यमिता को एक साथ मजबूत करना है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि करीब 4 हजार करोड़ रुपये की विश्व बैंक समर्थित इस परियोजना का फोकस पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड पर है। इन दोनों क्षेत्रों के 28 जनपदों के 123 विकास खंडों में परियोजना लागू की जा रही है। इसका लक्ष्य करीब 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर करते हुए 10 लाख किसानों, 35 हजार मत्स्य उत्पादक किसानों और 3 लाख महिलाओं को लाभ पहुंचाना है।

परियोजना के तहत खरीफ 2026 में 1.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को आच्छादित किया गया है। वहीं रबी फसल 2026-27 में गेहूं, मटर, चना, मसूर और सरसों जैसी फसलों की उत्पादकता बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि किसान को केवल उत्पादक नहीं, बल्कि आधुनिक कृषि और अर्थव्यवस्था का प्रॉस्पैरिटी पार्टनर बनाना सरकार का लक्ष्य है।

सीएम ने कहा कि कृषि में वैज्ञानिक और जलवायु अनुकूल तकनीकों को खेतों तक पहुंचाया जा रहा है। खरीफ 2026 में 3 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में डायरेक्ट सीडेड राइस यानी DSR का प्रयोग किया जा रहा है। इसके साथ धान, मक्का, बाजरा, ज्वार, अरहर, तिल, उड़द और मूंगफली जैसी फसलों को भी कार्ययोजना में शामिल किया गया है।

Google और Network for Humanity के साथ साझेदारी में ओपन नेटवर्क फॉर एग्रीकल्चर विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसका उद्देश्य किसानों को मौसम, बाजार मूल्य, मिट्टी, कृषि सलाह और अलग-अलग एग्रीटेक सेवाओं तक एक ही इंटरफेस के जरिए पहुंच उपलब्ध कराना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे किसानों को अलग-अलग सेवाओं के लिए अलग-अलग ऐप और प्लेटफॉर्म पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।

एग्रीटेक स्टार्टअप और कंपनियों को भी खुले नेटवर्क के जरिए बड़ी संख्या में किसानों तक सेवाएं पहुंचाने का अवसर मिलेगा। सरकार का लक्ष्य खेती की लागत कम करने, कम संसाधनों में अधिक आय हासिल करने और वैश्विक बाजार के अनुरूप कृषि उत्पादों की गुणवत्ता विकसित करने का है।

यूपी-एग्रीज के तहत धान और गेहूं के क्लाईमेट रेजिलिएंट कमोडिटी क्लस्टर विकसित करने के लिए ITC के साथ साझेदारी की जा रही है। दो लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र में क्लाईमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर के विस्तार का प्रस्ताव है। इसमें शून्य जुताई, डायरेक्ट सीडेड राइस, जलवायु अनुकूल उन्नत बीज और डिसिजन न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट जैसी आधुनिक तकनीकों को शामिल किया जाएगा।

बहराइच में 1500 एकड़ का धान क्लस्टर विकसित करने का प्रस्ताव भी रखा गया है। इसका लक्ष्य किसान की प्रति एकड़ आय में 20 से 30 प्रतिशत तक वृद्धि, यूरिया के उपयोग में 25 प्रतिशत कमी और श्रम तथा सिंचाई में 25 से 30 प्रतिशत तक बचत हासिल करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि धान, गेहूं, मिर्च, मक्का, हरी मटर और टमाटर जैसी फसलों के लिए प्रमुख निजी कंपनियों के साथ भी साझेदारी की जा रही है। इससे किसानों को बाजार और बेहतर खरीद व्यवस्था उपलब्ध कराने के साथ उत्पादन, संग्रहण, भंडारण, प्रसंस्करण और बाजार से जुड़ी पूरी वैल्यू चेन को मजबूत किया जाएगा।

मत्स्य पालन को भी तकनीक और उद्यमिता से जोड़ने की तैयारी है। AquaBridge के साथ साझेदारी के जरिए मत्स्य किसानों, सहकारिता समितियों और उद्यमियों को आधुनिक तकनीक और प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। इसमें AI आधारित एक्वाकल्चर मैनेजमेंट, ऑटोमैटिक फीडिंग टेक्नोलॉजी, प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

उन्नाव में IMC इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के तहत 60 एकड़ क्षेत्र में इंटीग्रेटेड एक्वाकल्चर परियोजना विकसित की जा रही है। इसमें हैचरी, फीड मैन्युफैक्चरिंग, प्रोसेसिंग फैसिलिटी और डेडिकेटेड ट्रेनिंग सेंटर प्रस्तावित है।

कृषि को खेत से फूड प्रोसेसिंग, एक्सपोर्ट और ग्लोबल वैल्यू चेन से जोड़ने की भी तैयारी है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास मेगा फूड पार्क और एग्री एक्सपोर्ट सेंटर विकसित करने का प्रस्ताव है। इसका उद्देश्य उत्तर प्रदेश की कृषि उपज को मंडी से आगे प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, लॉजिस्टिक्स और एक्सपोर्ट से जोड़ना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यूपी-एग्रीज का मूल दर्शन प्रोडक्टिविटी, टेक्नोलॉजी, क्लाईमेट रेजिलिएंट, मार्केट, एंटरप्राइज और फार्मर प्रॉस्पैरिटी है। सरकार का लक्ष्य किसानों को बेहतर बीज और तकनीक से उत्पादकता, क्लाईमेट स्मार्ट फार्मिंग से सस्टेनेबिलिटी, डिजिटल नेटवर्क से जानकारी और सेवाओं, कमोडिटी क्लस्टर से बाजार तथा प्रोसेसिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर से वैल्यू एडिशन तक जोड़ना है।

सीएम योगी ने कहा कि 21वीं सदी में कृषि मिट्टी और मौसम के साथ-साथ डेटा साइंस, विज्ञान-तकनीक और मार्केट इंटेलिजेंस से भी संचालित होगी। यूपी-एग्रीज के माध्यम से प्रदेश सरकार कृषि को भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार कर रही है और किसान को एग्री इनोवेशन की नई इकॉनमी का सक्रिय भागीदार बनाने की दिशा में काम कर रही है।

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