योगी सरकार की जननी सुरक्षा योजना का असर, यूपी में 7 लाख से ज्यादा संस्थागत प्रसव
(Lucknow, Lucknow) उत्तर प्रदेश में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य को सुरक्षित बनाने के लिए संचालित जननी सुरक्षा योजना लगातार असरदार साबित हो रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 1 अप्रैल से 9 अगस्त तक प्रदेश में 7,17,736 संस्थागत प्रसव हुए हैं। सरकार के मुताबिक, योजना के बेहतर क्रियान्वयन से सुरक्षित प्रसव को लेकर जागरूकता बढ़ी है और मातृ मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिल रही है।

जननी सुरक्षा योजना के तहत सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव कराने वाली गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में 1,400 रुपये और शहरी क्षेत्रों में 1,000 रुपये की सहायता का प्रावधान है। इसका उद्देश्य महिलाओं को घर पर प्रसव के बजाय अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में सुरक्षित प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना है।

स्वास्थ्य सचिव एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन निदेशक डॉ. पिंकी जोवल के मुताबिक, योजना के तहत 9 अगस्त तक हुए 7,17,736 संस्थागत प्रसव के मुकाबले 5,43,661 लाभार्थियों को भुगतान किया जा चुका है। सरकार की ओर से बाकी लाभार्थियों तक भी योजना का लाभ पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाथरस, मैनपुरी, फिरोजाबाद, हरदोई, कानपुर देहात, मुजफ्फरनगर और बागपत ने बेहतर प्रदर्शन किया है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में जौनपुर, अंबेडकरनगर और सोनभद्र जैसे जिलों में भी योजना के क्रियान्वयन और लाभार्थियों तक भुगतान पहुंचाने में अच्छा काम हुआ है। इन जिलों में 80 प्रतिशत से अधिक लाभार्थियों का भुगतान किया जा चुका है।

केजीएमयू की स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल के अनुसार, संस्थागत प्रसव सिर्फ प्रसव की जगह बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मां और नवजात दोनों की सुरक्षा से जुड़ा है। अस्पताल में प्रसव होने पर संभावित जटिलताओं की समय पर पहचान और उपचार किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर प्रशिक्षित डॉक्टर, स्टाफ नर्स, दवाएं, रक्त और आपातकालीन सेवाएं भी उपलब्ध कराई जा सकती हैं।

योजना का लाभ महिलाओं तक पहुंचाने में आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के फील्ड कर्मचारियों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। ये कार्यकर्ता गर्भवती महिलाओं को प्रसव पूर्व जांच, संस्थागत प्रसव और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी देने के साथ उन्हें समय पर स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने में मदद करते हैं।

सरकार के मुताबिक, सिद्धार्थनगर, बहराइच और अलीगढ़ में लाभार्थियों के भुगतान की स्थिति 50 प्रतिशत या उससे कम है। इन जिलों के स्थानीय अधिकारियों को सभी बाधाओं को दूर करते हुए शत-प्रतिशत लाभार्थियों का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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