वित्तीय वर्ष 2026-27 में योजना के लिए 40 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस वर्ष कुल 31,602 प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण ले रहे हैं, जिनमें O-Level के 24,240 और CCC के 7,362 प्रशिक्षणार्थी शामिल हैं। प्रशिक्षण 11 अगस्त से शुरू हो चुका है। योजना के लिए इस वर्ष 70 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे, जिसमें सबसे ज्यादा आवेदन O-Level प्रशिक्षण के लिए आए।
योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर OBC युवाओं को बिना किसी शुल्क के आधुनिक कंप्यूटर शिक्षा दी जा रही है। इसका उद्देश्य युवाओं की तकनीकी दक्षता बढ़ाने के साथ उनके रोजगार के अवसरों को भी मजबूत करना है। योजना का लाभ ऐसे OBC अभ्यर्थियों को दिया जा रहा है, जिन्होंने इंटरमीडिएट या उससे अधिक शिक्षा प्राप्त की है और जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे कम है।
प्रशिक्षण भारत सरकार के राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) से मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से कराया जा रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 338 प्रशिक्षण संस्थान इस योजना से जुड़े हैं। इनमें 63 संस्थान केवल O-Level, 39 संस्थान केवल CCC और 236 संस्थान दोनों पाठ्यक्रम संचालित कर रहे हैं। इससे प्रदेश के अधिकांश जिलों में युवाओं को अपने नजदीकी क्षेत्र में कंप्यूटर प्रशिक्षण प्राप्त करने की सुविधा मिल रही है।
सरकार की ओर से O-Level प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 15 हजार रुपये और CCC प्रशिक्षण के लिए 3,500 रुपये तक का भुगतान किया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के युवाओं पर प्रशिक्षण का आर्थिक बोझ नहीं पड़ता। निशुल्क कंप्यूटर प्रशिक्षण और व्यापक संस्थागत नेटवर्क के जरिए युवाओं को बदलती डिजिटल अर्थव्यवस्था की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।
पिछड़ा वर्ग कल्याण निदेशक उमेश प्रताप सिंह ने कहा कि इस वर्ष 31 हजार से अधिक प्रशिक्षणार्थी योजना के तहत प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य युवाओं को डिजिटल ज्ञान और रोजगारपरक कौशल उपलब्ध कराकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। 338 संस्थानों का नेटवर्क तैयार किया गया है, ताकि अधिक से अधिक युवाओं को उनके नजदीकी क्षेत्रों में तकनीकी प्रशिक्षण की सुविधा मिल सके।
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