राहुल गांधी शिक्षा व्यवस्था और छात्रों की समस्याओं पर अपनी बात रख रहे थे। उन्होंने कहा कि छात्र आठ से दस घंटे पढ़ाई करते हैं, शिक्षा महंगी है और उन्हें वर्षों तक तैयारी करनी पड़ती है। इसी दौरान उनके एक शब्द को लेकर ट्रेजरी बेंच की ओर से आपत्ति जताई गई।
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने आपत्ति जताते हुए कहा कि सदन में असंसदीय शब्दों का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए और संबंधित टिप्पणी को कार्यवाही से हटाया जाए।
विवाद के बीच राहुल गांधी ने कहा कि 'इडियट' शब्द की जगह वे दूसरा शब्द दे देते हैं। इस पर स्पीकर ने कहा कि इसके लिए उन्हें व्यवस्था देने की जरूरत नहीं है और आसन पहले ही अपना निर्णय दे चुका है।
इसके बाद राहुल गांधी ने छात्रों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि छात्र सजग हैं और सच्चाई जानते हैं। उन्होंने शिक्षा और परीक्षाओं पर होने वाले खर्च को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।
लोकसभा में असंसदीय शब्दों को लेकर क्या है नियम?
लोकसभा के नियम 380 के तहत अगर स्पीकर की राय में किसी सदस्य द्वारा इस्तेमाल किया गया शब्द मानहानिकारक, अशोभनीय, असंसदीय या सदन की गरिमा के खिलाफ है, तो उसे सदन की कार्यवाही से हटाने यानी Expunge करने का आदेश दिया जा सकता है।
नियम 381 के तहत कार्यवाही से हटाए गए हिस्से को आधिकारिक रिकॉर्ड में तारांकन (****) से दर्शाया जाता है और यह बताया जाता है कि संबंधित अंश आसन के आदेश पर हटाया गया है।
किसी शब्द पर फैसला केवल उस शब्द को अलग से देखकर नहीं, बल्कि उसके संदर्भ और सदन में इस्तेमाल की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए आसन करता है।
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