सौरव दास के अनुसार, सरकार के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक में उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई को लेकर अपनी आशंका जताई थी। उनका कहना है कि इस दौरान उन्हें बिहार सरकार के गृह विभाग की एक प्रेस विज्ञप्ति दिखाई गई, जिसमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में कार्रवाई न करने की बात कही गई।
इससे पहले CJP ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई नहीं रुकी और हिरासत में लिए गए छात्रों को राहत नहीं मिली, तो संगठन दोबारा आंदोलन शुरू करेगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CJP नेताओं आशुतोष रांका और सौरव दास के साथ वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल भी मौजूद थे। सिब्बल ने CJP के बनाए फंड में ₹1 करोड़ देने की घोषणा की और देशभर के वकीलों से भी इसमें योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि उनकी भूमिका संगठन के कानूनी मामलों में सहायता करने की होगी।
वहीं, बिहार सरकार ने घोषणा की है कि 26 जुलाई शाम 6 बजे से पहले राज्य में हुए विरोध प्रदर्शनों में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
CJP का कहना है कि उसने केंद्र सरकार के इस आश्वासन पर देशव्यापी आंदोलन स्थगित किया था कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि इस आश्वासन का पालन नहीं हुआ, तो वह आंदोलन फिर से शुरू करेगा।
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