नेपाल के रसुवा समेत कई इलाकों में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। नेपाल में 469 मौतों की पुष्टि हुई है और 977 लोग लापता बताए गए हैं। लापता लोगों में विदेशी नागरिकों के अलावा नेपाली सेना और नेपाल पुलिस के जवान भी शामिल हैं। तिब्बत में अब तक 3 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 558 लोग लापता हैं।
इस आपदा के बाद अब एक और खतरा मंडरा रहा है। बाढ़ के पानी और मलबे से ऊपरी क्षेत्र में एक झील जैसी जलराशि बनने की खबर है। अगर यह जलराशि दोबारा टूटती है तो निचले इलाकों में अचानक तेज बाढ़ आ सकती है। विशेषज्ञों और अधिकारियों की नजर संभावित दूसरे बाढ़ के खतरे पर बनी हुई है।
प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलनों में इस आपदा का संबंध ग्लेशियर के टूटने और उसके बाद हुए मलबे के तेज बहाव से जोड़ा गया है। शुरुआती तौर पर महसूस हुए झटकों को भूकंप समझा गया था, लेकिन बाद में इसे ग्लेशियल कोलैप्स और उससे जुड़े मलबे के बहाव से संबंधित बताया गया।
इस आपदा में बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक भी प्रभावित हुए हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नेपाल में करीब 288 भारतीय नागरिकों के संपर्क में नहीं होने की जानकारी सामने आई है। भारत और नेपाल की एजेंसियां प्रभावित भारतीयों की जानकारी जुटाने और राहत-बचाव प्रयासों में समन्वय कर रही हैं।
कई लापता लोग तीर्थयात्रा, पर्यटन और अन्य कामों के सिलसिले में सीमा क्षेत्र में मौजूद थे। कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले यात्रियों के भी प्रभावित होने की जानकारी सामने आई है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी नेपाल में हुई तबाही पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने नेपाल से संपर्क किया है और जरूरत पड़ने पर हर संभव मदद उपलब्ध कराने की पेशकश की है। अमेरिकी प्रशासन ने आपात सहायता की भी घोषणा की है।
फिलहाल नेपाल और चीन की एजेंसियां मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटी हैं। खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कें और दुर्गम पहाड़ी इलाका राहत अभियान के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। बचाव दलों की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक जल्द पहुंचा जा सके और संभावित दूसरी बाढ़ से पहले संवेदनशील इलाकों को सुरक्षित किया जाए
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