कार्यक्रम की शुरुआत में कुलगुरु प्रो. नन्द किशोर पाण्डेय ने मुख्य वक्ता डॉ. भगवान अटलानी का श्रीफल और शॉल भेंटकर सम्मान किया। अपने संबोधन में कुलगुरु ने कहा कि विश्वविद्यालय समय-समय पर ज्वलंत और समसामयिक विषयों पर विशेष व्याख्यान आयोजित करता रहा है।
मुख्य वक्ता डॉ. भगवान अटलानी ने कहा कि भारत का विभाजन बेहद पीड़ादायक था और सिंधी साहित्य आज भी यह त्रासदी झेल रहा है। विभाजन के समय 10 लाख से अधिक हिंदू सिंधी आबादी को पलायन कर भारत आना पड़ा। उन्होंने बताया कि उस समय यह चर्चा भी हुई थी कि गांधीधाम क्षेत्र सिंधी भाषियों को देकर उसे सिंध प्रदेश का नाम दिया जाए, लेकिन ऐसा संभव नहीं हो सका।
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