उन्होंने कहा कि घुसपैठिए देश की सुरक्षा, अर्थव्यवस्था और जनसांख्यिकीय संतुलन के लिए खतरा हैं। सरकार का लक्ष्य भारत को घुसपैठियों से मुक्त करना है।
शाह ने बताया कि उन्होंने पिछले आठ महीनों के दौरान सभी सीमावर्ती राज्यों का दौरा किया है। इस दौरान राज्यों के साथ सीमा सुरक्षा को लेकर रणनीति से संबंधित दस्तावेज भी साझा किए गए हैं।
गृह मंत्री ने आतंकवाद के खिलाफ PRAHAR रणनीति को रोजमर्रा की कार्रवाई का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को पूरी तरह खत्म करने के साथ उसके पूरे नेटवर्क को 360 डिग्री तरीके से निशाना बनाना जरूरी है।
अमित शाह ने कहा कि देश में आंतरिक सुरक्षा की तीन प्रमुख चुनौतियों—नक्सलवाद, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और पूर्वोत्तर के उग्रवाद—से जुड़ी चुनौतियों को सरकार ने खत्म कर दिया है।
उन्होंने इसका श्रेय राज्यों की पुलिस, केंद्रीय जांच एजेंसियों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बीच बेहतर समन्वय को दिया।
शाह ने कहा कि अगर पिछली सरकारों ने नशीले पदार्थों, नक्सलवाद और पूर्वोत्तर की समस्याओं को शुरुआती दौर में ही गंभीरता से लिया होता, तो देश को लंबे समय तक इन चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ता।
उन्होंने पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के खिलाफ हुई कार्रवाई को केंद्र और राज्यों के बीच तालमेल का उदाहरण बताया। शाह के मुताबिक, संगठन के कैडर के खिलाफ कार्रवाई और एक ही रात में प्रतिबंध लगाने का फैसला इसी समन्वय का हिस्सा था।
गृह मंत्री ने बताया कि 2019 से 2026 के बीच करीब 274 भगोड़ों को विदेश से भारत वापस लाया गया है।
उन्होंने राज्यों से अपील की कि विदेशों में छिपे भगोड़ों के खिलाफ लक्ष्य तय करके कार्रवाई की जाए और उन्हें भारतीय कानून के दायरे में लाया जाए।
शाह ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने मल्टी एजेंसी सेंटर को अपग्रेड किया है। इसका उद्देश्य विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचनाओं के बेहतर आदान-प्रदान और कई स्तरों पर कार्रवाई को प्रभावी बनाना है।
अमित शाह ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों को अगले एक साल में पूरी तरह लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। उनके मुताबिक, इससे आपराधिक मामलों के निपटारे की प्रक्रिया तेज होगी और सुप्रीम कोर्ट तक मामलों को तीन साल के भीतर निपटाने की दिशा में प्रगति होगी।
उन्होंने दावा किया कि नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से देश में सजा की दर में भी 25 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो सकती है।
NSS कॉन्फ्रेंस के दौरान शाह ने अधिकारियों से भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को लेकर लंबी अवधि की रणनीति तैयार करने को कहा।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को अगले 15 से 20 वर्षों में सामने आने वाले संभावित खतरों का अनुमान लगाना चाहिए और उनके बड़े संकट बनने से पहले ही उनसे निपटने की तैयारी करनी चाहिए।
उन्होंने युवा अधिकारियों को डेटा के इस्तेमाल, उसके विश्लेषण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से अपराध के नए तरीकों की पहचान करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि तकनीक और सूचनाओं के बेहतर विश्लेषण से भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों को समय रहते समझकर प्रभावी कार्रवाई की जा सकती है।
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