मामले में आवासीय इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर विवाद भी सामने आया है। इस मुद्दे पर मामला सुप्रीम कोर्ट में है और 15 सितंबर को महत्वपूर्ण सुनवाई प्रस्तावित है। इसी बीच अधिकारी और रहवासी अपने-अपने पक्ष की तैयारी में जुटे हैं।
विशेषज्ञ के अनुसार, मिक्स्ड लैंड यूज के तहत कुछ आवासीय क्षेत्रों में सीमित व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सकती है। हालांकि इसके लिए डायवर्जन प्रक्रिया और निर्धारित शुल्क लागू हो सकता है। यह प्रक्रिया पूरी होने में भी करीब 4 से 6 महीने लगने की संभावना बताई गई है।
सरकार की ओर से अरेरा कॉलोनी, बावड़ियाकलां और रोहित नगर जैसे बड़े इलाकों को मिक्स्ड लैंड यूज के दायरे में लाने की संभावना पर काम किया जा रहा है। इससे पार्किंग, सीवेज, बिजली और पानी जैसी सुविधाओं के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जरूरत भी बढ़ेगी।
आवासीय भवनों में व्यावसायिक गतिविधियों और अवैध निर्माण के मामलों में नगर निगम की कार्रवाई के बाद व्यापारियों ने विरोध प्रदर्शन किया। रिपोर्ट के अनुसार, हजारों दुकानदारों ने दुकानें बंद रखीं और अलग-अलग इलाकों में प्रदर्शन किए।
विरोध के बाद नगर निगम ने फिलहाल सीलिंग और नए नोटिस की कार्रवाई रोक दी है। वहीं, मास्टर प्लान को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भी अधिकारियों और रहवासियों की ओर से अपने पक्ष से अवगत कराया जा रहा है।
पूरे मामले का अगला रुख सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद साफ होने की उम्मीद है। सरकार की ओर से मास्टर प्लान से जुड़े दस्तावेज कोर्ट के सामने रखने और आगे की कार्रवाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार करने की बात कही गई है।
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