होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ा संकट, खाड़ी देशों ने तलाशे तेल निर्यात के नए रास्ते
(International) खाड़ी देशों के लिए लंबे समय से कच्चे तेल का निर्यात एक अपेक्षाकृत आसान प्रक्रिया रही है। तेल उत्पादन के बाद उसे होर्मुज स्ट्रेट के जरिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाता था। लेकिन ईरान के साथ बढ़े सैन्य तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में पैदा हुए सुरक्षा संकट ने इस व्यवस्था को बदलने पर मजबूर कर दिया है।

28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल की ओर से ईरान पर किए गए हमलों के बाद होर्मुज स्ट्रेट में तेल परिवहन प्रभावित हुआ। समुद्री बारूदी सुरंगों, मिसाइल और ड्रोन हमलों की आशंका, नाकेबंदी और बढ़ती बीमा लागत ने इस अहम समुद्री मार्ग से होने वाली तेल आवाजाही को काफी प्रभावित किया। रिपोर्टों के मुताबिक, जहां पहले इस रास्ते से रोजाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुजरता था, वहीं यह मात्रा घटकर करीब 37 लाख बैरल प्रतिदिन रह गई।इस स्थिति ने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे तेल उत्पादक देशों को अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर किया है। अब इन देशों का फोकस ऐसे विकल्प तैयार करने पर है, जिनसे तेल को होर्मुज स्ट्रेट से गुजारे बिना अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाया जा सके।

इस बदलाव में UAE सबसे आगे दिखाई दे रहा है। देश की अर्थव्यवस्था व्यापार और समुद्री परिवहन पर काफी निर्भर है, इसलिए होर्मुज संकट का असर कम करने के लिए अब वैकल्पिक निर्यात मार्ग तैयार किए जा रहे हैं।ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित फुजैरा में दूसरी तेल पाइपलाइन का काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रस्तावित पाइपलाइन अबू धाबी के तेल क्षेत्रों को सीधे फुजैरा से जोड़ेगी। इसका फायदा यह होगा कि तेल ले जाने वाले टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट पार करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

परियोजना पूरी होने के बाद UAE की होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करते हुए तेल निर्यात करने की क्षमता बढ़कर करीब 36 लाख बैरल प्रतिदिन हो सकती है। इससे अबू धाबी के बड़े हिस्से के ऑनशोर तेल को सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का विकल्प मजबूत होगा।

ऑनशोर तेल जमीन पर स्थित तेल क्षेत्रों से निकाला गया कच्चा तेल होता है, जबकि ऑफशोर तेल समुद्र में स्थित तेल क्षेत्रों से निकाला जाता है।UAE की रणनीति सिर्फ कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। देश प्राकृतिक गैस के निर्यात को भी सुरक्षित बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

सरकारी ऊर्जा कंपनी ADNOC ने प्राकृतिक गैस परियोजनाओं में 8.2 अरब डॉलर के निवेश की योजना घोषित की है। इसके साथ ही देश के पूर्वी तट पर नया LNG निर्यात टर्मिनल विकसित करने की योजना भी सामने आई है। इसका उद्देश्य भविष्य में गैस निर्यात के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर निर्भरता कम करना है।
होर्मुज स्ट्रेट में जोखिम बढ़ने के बाद सऊदी अरब ने अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर निर्भरता बढ़ा दी है। करीब 1,201 किलोमीटर लंबी यह पाइपलाइन देश के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर के किनारे स्थित यानबू बंदरगाह से जोड़ती है।

यह पाइपलाइन मूल रूप से 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौर में तैयार की गई थी। अब सऊदी अरब इसके जरिए प्रतिदिन करीब 70 लाख बैरल कच्चा तेल लाल सागर के रास्ते अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचा रहा है।देश इसकी क्षमता में 10 से 20 लाख बैरल प्रतिदिन तक की अतिरिक्त वृद्धि की तैयारी कर रहा है। इसके अलावा रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के परिवहन के लिए अलग पाइपलाइन नेटवर्क विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है।

कुवैत भी होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता घटाने के लिए वैकल्पिक रास्तों पर विचार कर रहा है। इसके लिए सऊदी अरब और दूसरे अरब देशों के साथ ऐसी पाइपलाइन की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है, जो कुवैत के तेल क्षेत्रों को लाल सागर या ओमान के बंदरगाहों से जोड़ सके।दूसरी ओर, इराक और जॉर्डन ने लंबे समय से अटकी एक पाइपलाइन परियोजना को फिर से आगे बढ़ाने का फैसला किया है। प्रस्तावित पाइपलाइन के जरिए इराक से प्रतिदिन करीब 10 लाख बैरल तेल लाल सागर के अकाबा बंदरगाह तक पहुंचाने की क्षमता विकसित की जा सकती है।इराक किरकुक से सीरिया के भूमध्यसागरीय तट तक जाने वाली क्षतिग्रस्त पाइपलाइन को फिर से सक्रिय करने की दिशा में भी काम कर रहा है।

खाड़ी देशों की तैयारी केवल पाइपलाइन और नए बंदरगाहों तक सीमित नहीं है। संभावित आपूर्ति संकट से निपटने के लिए एशिया के बड़े तेल उपभोक्ता देशों में भी अतिरिक्त कच्चे तेल का भंडारण बढ़ाने की रणनीति अपनाई जा रही है।

भारत, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में अतिरिक्त तेल स्टोरेज तैयार करने पर जोर है। इसका उद्देश्य यह है कि अगर भविष्य में होर्मुज स्ट्रेट से तेल की आवाजाही पूरी तरह रुकती है, तो बाजार में पहले से उपलब्ध भंडार के जरिए कुछ समय तक आपूर्ति बनाए रखी जा सके।हालांकि, खाड़ी देशों के सामने एक बड़ी चुनौती यह है कि वैकल्पिक समुद्री रास्ते भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं।

सऊदी अरब के तेल का एक बड़ा हिस्सा अब लाल सागर और बाब अल-मंदेब स्ट्रेट जैसे रास्तों से गुजर सकता है। लेकिन इस क्षेत्र में यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से जहाजों को निशाना बनाए जाने का खतरा बना हुआ है। हाल ही में लाल सागर में एक जहाज पर हुए हमले में छह लोगों की मौत की खबर सामने आई।ऐसे में खाड़ी देशों के लिए सिर्फ होर्मुज स्ट्रेट से दूरी बनाना पर्याप्त नहीं होगा। उन्हें वैकल्पिक मार्गों की सुरक्षा, बीमा लागत और समुद्री जोखिमों को भी ध्यान में रखना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी देश आने वाले समय में होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी निर्भरता निश्चित रूप से कम करने की कोशिश करेंगे, लेकिन इसे पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होगा।
क्रिस्टोल एनर्जी की चीफ एनालिस्ट कैरोल नखले के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट के आर्थिक और भौगोलिक फायदे इतने महत्वपूर्ण हैं कि इसे पूरी तरह किसी दूसरे रास्ते से बदलना मुश्किल है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों ने यह साफ कर दिया है कि केवल एक समुद्री मार्ग पर निर्भर रहना अब खाड़ी देशों के लिए पहले जैसा सुरक्षित विकल्प नहीं है।

होर्मुज स्ट्रेट आने वाले समय में भी वैश्विक तेल कारोबार का अहम हिस्सा बना रहेगा, लेकिन इसके आसपास बढ़ते सुरक्षा जोखिमों ने खाड़ी देशों को वैकल्पिक पाइपलाइन, नए निर्यात टर्मिनल और रणनीतिक तेल भंडारण की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर दिया है।

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