पुस्तक प्रदर्शनी के साथ महोत्सव में साहित्यिक संवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम, बच्चों के लिए रचनात्मक गतिविधियां, विभिन्न कार्यशालाएं और तकनीक से जुड़े आयोजन भी होंगे। आयोजन का उद्देश्य पाठकों को पुस्तकों से जोड़ने के साथ साहित्य, ज्ञान और भारतीय संस्कृति के प्रति रुचि को बढ़ावा देना है।
महोत्सव परिसर में करीब 250 पुस्तक स्टॉल** लगाए गए हैं, जिनमें 121 प्रकाशक हिस्सा ले रहे हैं। हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, अवधी सहित कई भारतीय भाषाओं में हजारों पुस्तकें पाठकों के लिए उपलब्ध हैं।
साहित्य, इतिहास, संस्कृति, जीवनी, कला, शिक्षा, अध्यात्म और समकालीन विषयों से जुड़ी पुस्तकों का व्यापक संग्रह यहां देखने को मिल रहा है। राष्ट्रीय पुस्तक न्यास के प्रोग्राम ऑफिसर नरेंद्र सिंह के मुताबिक एनबीटी करीब **70 भाषाओं** में पुस्तकों का प्रकाशन करता है और उसके संग्रह में लगभग **10 हजार पुस्तकें** हैं।
दिव्यांश पब्लिकेशन के प्रबंध निदेशक नीरज अरोड़ा ने बताया कि उनके स्टॉल पर अलग-अलग विषयों की पुस्तकों के साथ हिंद युग का स्टॉल भी लगाया गया है। वहीं राजकमल प्रकाशन के सीनियर सेल्स मैनेजर विनोद तिवारी के अनुसार उनके स्टॉल पर हिंदी की करीब **5 हजार पुस्तकें** उपलब्ध हैं।
गोमती पुस्तक महोत्सव में साहित्य से लेकर विज्ञान और समकालीन विषयों तक विभिन्न मुद्दों पर विशेषज्ञों के साथ संवाद सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। इनमें दिल्ली के उपराज्यपाल **तरनजीत सिंह संधू**, भारतीय अंतरिक्ष यात्री **ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला**, लोकगायिका **मालिनी अवस्थी**, लेखक **शांतनु गुप्ता** और पद्मश्री सम्मानित **डॉ. विद्या विंदु सिंह** समेत कई प्रमुख हस्तियां हिस्सा लेंगी।
इन संवादों में महिला अस्मिता, साहित्य, विज्ञान, अंतरिक्ष, समाज और समकालीन भारत से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया जाएगा।
महोत्सव में बच्चों के लिए विशेष **बाल मंडप** तैयार किया गया है। नेशनल सेंटर फॉर चिल्ड्रन्स लिटरेचर की ओर से आयोजित इस हिस्से में नौ दिनों तक अलग-अलग गतिविधियां चलेंगी।
बच्चों के लिए कठपुतली नाटक, स्टोरीटेलिंग, वैदिक गणित, माइंडफुलनेस वर्कशॉप, क्ले आर्ट, पोस्टर मेकिंग, सुलेख, कैरिकेचर स्टूडियो, कविता पाठ, मंडला कला और रचनात्मक लेखन जैसी गतिविधियां रखी गई हैं। चित्रकला और क्विज प्रतियोगिताएं भी आयोजित होंगी।ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के साथ बच्चों का विशेष संवाद सत्र भी कार्यक्रम का हिस्सा होगा।
गोमती पुस्तक महोत्सव में किताबों के साथ उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत की झलक भी देखने को मिलेगी। हर शाम सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया जाएगा।
कार्यक्रमों में पारस बैंड की प्रस्तुति, कथक, बिरजू महाराज कथक संस्थान की **‘रघुवंशम’** कथक नृत्य-नाटिका, सुगम संगीत, मुशायरा और लोक प्रस्तुतियां शामिल हैं। भारतेन्दु नाट्य अकादमी की नाट्य प्रस्तुति के साथ बेगम अख्तर को समर्पित विशेष दास्तानगोई भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहेगी।
राष्ट्रगीत **‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष** पूरे होने के अवसर पर राष्ट्रीय पुस्तक न्यास की ओर से विशेष प्रदर्शनी लगाई गई है। एनबीटी के चेयरमैन मिलिंद मराठे के अनुसार देशभर में आयोजित पुस्तक आयोजनों के दौरान इस विशेष प्रदर्शनी को लोगों तक पहुंचाया जा रहा है।
प्रदर्शनी के जरिए राष्ट्रगीत से जुड़े इतिहास और उसके महत्व से लोगों को परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है।
महोत्सव में डिजिटल पढ़ाई और ई-पुस्तकों को भी विशेष स्थान दिया गया है। बच्चों, युवाओं, विद्यार्थियों और शिक्षकों को राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की जानकारी देने की व्यवस्था की गई है।
राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय की क्षेत्रीय जुड़ाव विशेषज्ञ मुस्कान कोहली ने बताया कि डिजिटल लाइब्रेरी में **22 से अधिक भाषाओं की 7 हजार से ज्यादा ई-पुस्तकें** उपलब्ध हैं। इसका उद्देश्य पाठकों को डिजिटल माध्यम से भी गुणवत्तापूर्ण साहित्य तक पहुंच उपलब्ध कराना है।
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत के निदेशक युवराज मलिक ने कहा कि गोमती पुस्तक महोत्सव पुस्तकालयों और पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण आयोजन है। बच्चों और युवाओं के लिए पूरे महोत्सव के दौरान विभिन्न गतिविधियां और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
उन्होंने बताया कि महोत्सव में **प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क** रखा गया है। पुस्तक प्रदर्शनी, साहित्यिक संवाद, सांस्कृतिक कार्यक्रम और बच्चों की गतिविधियों के जरिए आयोजन को सभी आयु वर्ग के लोगों के लिए उपयोगी और आकर्षक बनाने का प्रयास किया गया है।
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