नेपाल में अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। इनमें विदेशी नागरिक और बड़ी संख्या में भारतीय भी शामिल हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी सैकड़ों लोगों के लापता होने की सूचना है। खराब मौसम, क्षतिग्रस्त सड़कों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण बचाव दलों को अभियान में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
नेपाल में सेना और अन्य राहत एजेंसियां प्रभावित इलाकों में लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। नेपाली सेना ने रसुवा जिले के टिमुरे इलाके से 116 लोगों को सुरक्षित निकाला है। इनमें नेपाली नागरिकों के साथ भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत सामग्री पहुंचाने और फंसे लोगों को निकालने के लिए हेलिकॉप्टरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
बाढ़ के कारण कई सड़कें, पुल और दूसरी आधारभूत संरचनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। प्रभावित इलाकों में बड़ी मात्रा में मलबा जमा होने से कई बस्तियों तक पहुंचना मुश्किल बना हुआ है।
बुधवार सुबह नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए थे। शुरुआती जानकारी में इसे भूकंप माना गया और अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने शुरुआत में इसकी तीव्रता 4.4 बताई थी।
बाद की जांच में तस्वीर अलग सामने आई। वैज्ञानिक विश्लेषण के अनुसार पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ, चट्टानों और मलबे के साथ ल्हेंदे नदी में गिरा। इससे नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा और तेज बहाव ने आगे के इलाकों में तबाही मचा दी। USGS ने बाद में स्पष्ट किया कि दर्ज किया गया भूकंपीय संकेत वास्तव में भूस्खलन और उससे जुड़े मलबे के बहाव से पैदा हुआ था।
ल्हेंदे नदी आगे चलकर भोटेकोशी नदी की सहायक नदी से जुड़ती है। भोटेकोशी नदी तिब्बत से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है। इसी नदी तंत्र में अचानक भारी मात्रा में बर्फ और चट्टानों के पहुंचने से फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति बनी।
सैटेलाइट तस्वीरों और शुरुआती वैज्ञानिक आकलनों ने भी ल्हेंदे नदी क्षेत्र में बड़े भूस्खलन की ओर संकेत किया है।
प्रभावित क्षेत्र में राहत और बचाव कार्य जारी है, लेकिन पहाड़ी इलाकों में लगातार खराब मौसम और अतिरिक्त भूस्खलन का खतरा अभियान को चुनौतीपूर्ण बना रहा है। चीन की ओर भी एक अस्थायी झील बनने से आगे खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई है।
इस आपदा ने नेपाल-तिब्बत सीमा के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अचानक आने वाली बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को एक बार फिर सामने ला दिया है। फिलहाल दोनों देशों की एजेंसियां लापता लोगों की तलाश और प्रभावित लोगों तक राहत पहुंचाने में जुटी हैं।
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