इस साल कुल 17 खिलाड़ियों को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है। इनमें शतरंज खिलाड़ी दिव्या देशमुख और विदित गुजराती, एथलीट तेजस्विन शंकर तथा बैडमिंटन खिलाड़ी गायत्री गोपीचंद और तृषा जॉली जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं।
फुटबॉल के दिग्गज आई. अरुमायनायगम को अर्जुन अवॉर्ड की लाइफटाइम कैटेगरी के लिए चुना गया है। 84 वर्षीय अरुमायनायगम 1962 के जकार्ता एशियन गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय फुटबॉल टीम का हिस्सा रहे थे
अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुने गए एथलीट तेजस्विन शंकर की कहानी भी बेहद प्रेरणादायक है। उनके पिता चाहते थे कि वह पढ़ाई पर ध्यान दें और अगर खेलना ही है तो क्रिकेट खेलें। लेकिन स्कूल के कोच ने तेजस्विन की एथलेटिक क्षमता को पहचाना और धीरे-धीरे उन्होंने हाई जंप को अपना करियर बना लिया।
महज 17 साल की उम्र में तेजस्विन ने 2.26 मीटर की छलांग लगाकर सीनियर नेशनल रिकॉर्ड तोड़ दिया था। इससे पहले 15 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को भावुक चिट्ठी लिखकर एथलेटिक्स जारी रखने की अनुमति मांगी थी। पिता ने उन्हें इसकी इजाजत दे दी, हालांकि कुछ समय बाद ही उनका निधन हो गया।
तेजस्विन के करियर में बड़ा मोड़ 2022 में आया। उन्होंने 2.27 मीटर का कॉमनवेल्थ गेम्स क्वालिफाइंग मार्क हासिल किया और ऐसा करने वाले इकलौते भारतीय बने। इसके बावजूद बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए उनका भारतीय टीम में चयन नहीं हुआ।
तेजस्विन ने इस फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट के आदेश के बाद उन्हें भारतीय टीम में शामिल किया गया। बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में उन्होंने 2.22 मीटर की छलांग लगाकर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया।
शतरंज में दिव्या देशमुख और विदित गुजराती को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है। दिव्या ने 2025 में FIDE महिला विश्व कप का खिताब जीतकर भारतीय शतरंज में बड़ी उपलब्धि हासिल की थी।
वहीं विदित गुजराती लंबे समय से भारतीय शतरंज के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
बैडमिंटन में गायत्री गोपीचंद और तृषा जॉली को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया है। दोनों महिला डबल्स में भारत की प्रमुख खिलाड़ियों में रही हैं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर कई अहम मुकाबलों में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।
खेल रत्न पुरस्कार की शुरुआत 1991-92 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव की सरकार के दौरान हुई थी। उस समय इसका नाम राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार था।
साल 2021 में इस पुरस्कार का नाम बदलकर मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार कर दिया गया। इस साल किसी भी खिलाड़ी को खेल रत्न के लिए नहीं चुना गया है, जिससे राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 की घोषणा खास तौर पर चर्चा में आ गई है।
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