इस्लामाबाद में गुरुवार को एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान का रुख कभी नहीं बदलेगा। उन्होंने अपने भाषण में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की तारीफ करते हुए दावा किया कि उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने भारत को हराया।
शहबाज शरीफ ने चीन-पाकिस्तान संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों की दोस्ती हिमालय से भी ऊंची है। उन्होंने चीन को पाकिस्तान का करीबी दोस्त बताते हुए कहा कि मुश्किल समय में चीन हमेशा पाकिस्तान के साथ खड़ा रहा है।
उन्होंने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष विराम को लेकर भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका का दावा दोहराया। शहबाज ने कहा कि ट्रंप की पहल से समय रहते युद्धविराम संभव हुआ।हालांकि, भारत का रुख इससे अलग रहा है। भारत लगातार कहता रहा है कि संघर्ष विराम दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच हुई सीधी बातचीत के बाद हुआ था और इसमें किसी तीसरे देश की मध्यस्थता नहीं थी।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कश्मीर मुद्दे को भी उठाया। उन्होंने कहा कि कश्मीर को लेकर पाकिस्तान की नीति में कोई बदलाव नहीं आएगा और कश्मीरियों की कुर्बानी को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।उन्होंने फिलिस्तीन के लोगों के अधिकारों का समर्थन जारी रखने की बात कही। साथ ही अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार से अपील की कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों के लिए न होने दे।शहबाज शरीफ ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित करने का फैसला लिया था। इसके बाद से यह मुद्दा दोनों देशों के बीच तनाव का एक बड़ा कारण बना हुआ है।
भारत का कहना है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ ठोस और भरोसेमंद कदम नहीं उठाता, तब तक संधि पर रोक जारी रहेगी।वहीं पाकिस्तान का दावा है कि सिंधु जल संधि कानूनी रूप से प्रभावी है और इसे एकतरफा तरीके से निलंबित नहीं किया जा सकता।
भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से सिंधु जल संधि हुई थी। इस समझौते के तहत सिंधु नदी प्रणाली की छह प्रमुख नदियों के पानी का बंटवारा किया गया था।भारत को रावी, ब्यास और सतलुज नदियों के पानी के उपयोग का अधिकार मिला।
पाकिस्तान को सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का पानी मिला।
सिंधु जल संधि को दुनिया के सबसे लंबे समय तक चलने वाले जल समझौतों में से एक माना जाता रहा है। हालांकि, हाल के वर्षों में आतंकवाद और सीमा विवादों के कारण यह समझौता दोनों देशों के बीच तनाव का नया केंद्र बन गया है।
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