ट्रम्प ने अपने पोस्ट में दावा किया कि इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से सवाल किया था कि अमेरिका में वैध फोटो ID के बिना चुनाव कैसे हो सकते हैं। इसी का हवाला देते हुए ट्रम्प ने कहा कि अब अमेरिका में चुनाव प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को पास करना जरूरी है।
‘सेव अमेरिका एक्ट’ अमेरिका में मतदाता पंजीकरण और मतदान प्रक्रिया से जुड़े नियमों को सख्त करने वाला प्रस्तावित कानून है। इसके तहत वोटर रजिस्ट्रेशन के समय नागरिकता साबित करने वाले दस्तावेज और मतदान के दौरान फोटो पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य करने का प्रावधान है।
इस विधेयक में डाक के जरिए मतदान यानी मेल-इन वोटिंग की प्रक्रिया को भी सीमित करने की बात कही गई है। समर्थकों का मानना है कि इससे चुनावी धोखाधड़ी की संभावनाएं कम होंगी और चुनाव व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बढ़ेगा।यह विधेयक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से पारित हो चुका है, लेकिन अभी तक सीनेट में इसे मंजूरी नहीं मिली है।
अमेरिका में वोटर ID को लेकर लंबे समय से राजनीतिक विवाद चलता रहा है। रिपब्लिकन पार्टी के नेता, जिनमें ट्रम्प भी शामिल हैं, का कहना है कि सख्त पहचान नियम चुनावों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए जरूरी हैं।वहीं डेमोक्रेट्स और कानून के आलोचकों का तर्क है कि अमेरिका में गैर-नागरिकों के मतदान पर पहले से रोक है। उनका कहना है कि ज्यादा दस्तावेजी शर्तें उन नागरिकों के लिए परेशानी पैदा कर सकती हैं, जिनके पास जन्म प्रमाणपत्र या पासपोर्ट जैसे दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।
बाइपार्टिसन पॉलिसी सेंटर के अनुसार, अमेरिका में करीब 12 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं के पास ऐसे दस्तावेज नहीं हैं, जिन्हें आमतौर पर पहचान प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाता है।
दुनिया के अलग-अलग देशों में मतदान पहचान को लेकर अलग-अलग नियम लागू हैं।ब्रिटेन में कुछ चुनावों में मतदान केंद्र पर फोटो ID दिखाना जरूरी है, हालांकि स्कॉटलैंड और वेल्स के कुछ स्थानीय चुनावों में यह अनिवार्य नहीं है।कनाडा में मतदाता को अपनी पहचान और पता साबित करना होता है, लेकिन केवल फोटो ID ही जरूरी नहीं होती। वहां मतदाता एक फोटो पहचान पत्र या दो अन्य मान्य दस्तावेजों के जरिए अपनी पहचान साबित कर सकता है। कुछ परिस्थितियों में दूसरा मतदाता भी उसकी पहचान की पुष्टि कर सकता है।
डोनाल्ड ट्रम्प लंबे समय से अमेरिकी चुनाव प्रक्रिया में कड़े नियमों की वकालत करते रहे हैं। उनका कहना है कि ‘सेव अमेरिका एक्ट’ लागू होने से चुनावों में पारदर्शिता बढ़ेगी और संभावित गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।हालांकि, इस कानून को लेकर अमेरिका में राजनीतिक सहमति अभी तक नहीं बन पाई है। आने वाले समय में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में एक बड़ा बहस का विषय बना रह सकता है।
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