इसी क्रम में लखनऊ स्थित पुलिस मुख्यालय में ZFD योजना के तीसरे और चौथे चरण के तहत गठित क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारियों के लिए एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें 59 जिलों के 213 दुर्घटना बाहुल्य स्थानों पर गठित 228 क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों के प्रभारी और ZFD नोडल अधिकारियों ने भाग लिया। कार्यशाला में सड़क दुर्घटनाओं के कारणों का वैज्ञानिक विश्लेषण, प्रभावी रोकथाम और प्रवर्तन कार्रवाई को लेकर प्रशिक्षण दिया गया।
पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को सिर्फ एक आकस्मिक घटना मान लेना पर्याप्त नहीं है। हर हादसे के पीछे मौजूद कारणों को समझना और उन्हें दूर करना जरूरी है। उन्होंने टीम प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान करने के साथ वहां हादसों के कारणों का विश्लेषण कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।
डीजीपी ने दुर्घटना की रोकथाम और दुर्घटना की जांच को विशेषज्ञता वाले कार्य बताते हुए टीमों को तकनीकी और व्यावहारिक दक्षता विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने संबंधित विभागों के साथ बेहतर समन्वय बनाए रखने और चिन्हित कमियों को दूर करने के लिए किए गए प्रयासों की लगातार समीक्षा एवं फॉलोअप करने के निर्देश दिए।
कार्यशाला में डीजीपी ने स्पष्ट किया कि क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों की भूमिका केवल हादसा होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है। दुर्घटना रोकना भी टीम की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक दुर्घटना के बाद उसके कारणों की समीक्षा होनी चाहिए। यह देखा जाए कि सड़क, यातायात व्यवस्था, प्रवर्तन या अन्य किसी स्तर पर कौन सी कमी हादसे का कारण बनी और भविष्य में उसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए किस तरह के सुधार की जरूरत है।
इसके साथ ही आवश्यक प्रवर्तन कार्रवाई, सड़क सुरक्षा उपायों और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा तय प्रक्रिया का लगातार पालन करने पर भी जोर दिया गया।
ZFD योजना के तहत किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। जनवरी से अगस्त 2026 के दौरान योजना के दायरे में आने वाले स्थानों पर पिछले साल की समान अवधि की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में 6.97 प्रतिशत, मृतकों की संख्या में 8.03 प्रतिशत और घायलों की संख्या में 6.11 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में 1,255 सड़क दुर्घटनाएं कम हुईं और 1,107 लोगों की जान बचाने में सफलता मिली। यानी औसतन प्रतिदिन करीब सात सड़क दुर्घटनाएं कम हुईं और लगभग पांच लोगों की जान बची।
जीरो फैटैलिटी डिस्ट्रिक्ट योजना का आधार ‘जहां दुर्घटनाएं अधिक, वहां कार्रवाई अधिक’ का सिद्धांत है। इसके तहत वैज्ञानिक तरीके से दुर्घटना बाहुल्य स्थानों को चिन्हित किया जा रहा है। ऐसे स्थानों पर लक्षित प्रवर्तन के साथ सड़क सुरक्षा उपायों को लागू करने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने पर जोर दिया जा रहा है।
सड़क अभियांत्रिकी से जुड़ी कमियों की पहचान कर उन्हें संबंधित विभागों के माध्यम से दूर कराने को भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। इससे केवल दुर्घटना के बाद की कार्रवाई के बजाय हादसे की संभावना को पहले ही कम करने पर फोकस किया जा रहा है।
कार्यशाला के दौरान क्रिटिकल कॉरिडोर टीमों को सड़क सुरक्षा और दुर्घटना रोकथाम से जुड़े विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण दिया गया। इसमें मोटर वाहन अधिनियम, दुर्घटना जांच, ब्लैक स्पॉट की पहचान, प्राथमिक उपचार और CPR समेत अन्य महत्वपूर्ण विषय शामिल रहे।
डीजीपी ने टीमों को सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और जांच में विशेषज्ञता विकसित करने, नियमित प्रशिक्षण लेने तथा उपलब्ध तकनीकी एवं अन्य संसाधनों का अधिकतम प्रभावी इस्तेमाल करने के निर्देश दिए। हादसों के कारणों की वैज्ञानिक पहचान और समयबद्ध सुधार के जरिए प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं से होने वाली जनहानि को और कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।