(India)
नासा ने बताया कि यह किसी आकाशीय पिंड पर किसी भी मानवनिर्मित यान द्वारा तय की गई अब तक की सर्वाधिक दूरी है। वर्ष 2005 में इस लाल ग्रह पर पहुंचने के बाद से अब तक इस सौर-उर्जा संचालित रोबोट ने मंगल पर लगभग 40 किलोमीटर की दूरी तय कर ली है, जो पूर्व में सोवियत रूस के ‘लूनोखोद 2’ रोवर द्वारा तय की गई दूरी से अधिक है। रूस का यह रोवर वर्ष 1973 में चांद पर उतरा था। कैलिफोर्निया स्थित नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी (जेपीएल) के ‘मार्स एक्सप्लोरेशन रोवर प्रोजेक्ट’ के प्रबंधक जॉन कैलास ने बताया कि ऑपरचुनिटी ने किसी दूसरी दुनिया में जाने वाले किसी भी अन्य यान की तुलना में ज्यादा तेज गति से दूरी तय की है। उन्होंने बताया कि यह काफी उल्लेखनीय है क्योंकि ऑपरचुनिटी को एक किलोमीटर के करीब दूरी तय करने को ध्यान में रखकर बनाया गया था। इसका निर्माण दूरियां तय करने के उद्देश्य से नहीं किया गया था। ‘ऑपरचुनिटी’ और उसके जुड़वां (उसके जैसे) रोवर ‘स्पिरिट’ (अब निष्क्रिय) ने मंगल ग्रह पर पर्यावरणीय की जलीय परिस्थितियों की खोज की, जहां ऐसे भी कुछ स्थान थे जहां जीवन की संभावना प्रबल थी। ऑपरचुनिटी’ अब मंगल ग्रह पर इंडीवर नामक केट्रर :गड्ढे: पर खोज कर रहा है। इसकी अगली पीढ़ी के रोबोटिक प्रतिरूप ‘क्यूरोसिटी’ रोवर को वर्ष 2012 में लॉन्च किया जा चुका है और यह मंगल ग्रह पर गेल नामक क्रेटर के आस पास चक्कर काट रहा है। नासा ने बताया कि सोवियत संघ के ‘लूनाखोद 2’ रोवर 15 जनवरी 1973 में पृथ्वी के चंद्रमा पर उतरा था और उसने पांच महीनों से भी कम समय में 39 किलोमीटर की दूरी तय की थी।
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