एमआइटी में भारतीय मूल के एक अनुसंधानकर्ता एक गोल जलमग्न रोबोट तैयार किया है। ये फुटबाल के जितना छोटा है। ये नन्हा रोबोट बंदरगाहों की सुरक्षा का काम करेगा। ये देखेगा कि बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे बड़े जहाज कहीं छिछले इलाके में न आने पाएं। ताकि जहाज और बंदरगाह को कोई नुकसान न पहुंचे। मैसाचुएट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलाजी (एमआइटी) की मैकनिकल इंजीनियरिंग की छात्र संप्रति भट्टाचार्य ने एक ऐसे रोबोट का अनावरण किया है जो पानी के अंदर तैरते हुए भूमिगत दृश्य की स्कैनिंग करता है और जल के अंदर का सारा हाल लोगों को बता देता है। मूलतरू इस रोबोट का निर्माण नाभिकीय रीएक्टरों के वाटर टैंकर में दरार ढूंढने के लिए किया गया था। ये रोबोट जहाजों के भ्रम को दूर करने और कांट्राबैंड्स को छिपाने के लिए समुद्री तस्करों की ओर से इस्तेमाल किए जाने वाले प्रोपेलरों की तलाश में भी काम आ सकता है। इसके अलावा जहाज के सिरों को काई और समुद्री पौधों के जाल से भी बचाने में ये सहायक साबित हो सकता है। संप्रति भट्टाचार्य के शोध में सहायक इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैरी असाडा ने बताया कि बंदरगाहों की सुरक्षा के लिए परंपरागत रोबोट का इस्तेमाल बेहद खर्चीला है।
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