मोबाइल नेटवर्क कंपनियों के लिए मैसेजिंग ऐप्स बड़ा सिरदर्द बनते जा रहे हैं। यही वजह है कि दूरसंचार नियामक आयोग (ट्राई) और कंपनियां इनके लिए नया कानूनी ढांचा बनाने की बात कर रही हैं। जिससे उनकी कमाई में सेंध लगाने का सिलसिला बंद हो सके। क्या आप जानते हैं कि मोबाइल ऑपरेटर चैट ऐप्स की कमाई में हिस्सा क्यों मांग रहे हैं? मोबाइल कंपनियों का कहना है कि मैसेजिंग ऐप्स उनके संसाधनों को बांट रहे हैं, पर कमाई साझा नहीं कर रहे हैं। इन ऐप्स ने एसएमएस से होने वाली कमाई पर करारी चोट की है। पिछले तीन साल में एसएमएस से होने वाली आमदनी में इन ऐप्स की वजह से 50 प्रतिशत की गिरावट आई है।
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