इसरो की कामयाबी से घबराया अमेरिका का निजी अंतरिक्ष उद्योग
(India)
अमेरिका का निजी अंतरिक्ष उद्योग भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की कामयाबी को सहन नहीं कर पा रहा है। उसने अमेरिकी उपग्रह को कक्षा में पहुंचाने के लिए बड़े पैमाने पर कम लागत वाले इसरो के प्रक्षेपण यानों के इस्तेमाल का विरोध किया है। उसका यह विरोध ऐसे वक्त सामने आया है, जब अंतरिक्ष के क्षेत्र में अमेरिका भारत के साथ सहयोग को बढ़ावा दे रहा है। अमेरिका का निजी अंतरिक्ष उद्योग काफी नया है। यह बेहद तेजी से उभर रहा है। इसके कारोबारी नेताओं और अधिकारियों ने इस सप्ताह सांसदों को बताया कि इसरो के प्रक्षेपण यानों का इस्तेमाल करने जैसा कदम अमेरिकी अंतरिक्ष उद्योग कंपनियों के लिए भविष्य में घातक साबित होगा। उन्होंने कहा कि इसरो के कम लागत वाले प्रक्षेपण यानों से प्रतिस्पर्धा करना उनके लिए मुश्किल होगा।इन कंपनियों ने आरोप लगाया कि कम लागत के लिए भारत सरकार की सब्सिडी देने की नीति जिम्मेदार है। स्पेस फाउंडेशन के सीईओ इलियट होलोकाउई पुलहम ने कहा, भारतीय प्रक्षेपण यानों के इस्तेमाल को लेकर हमारी चिंता यह नहीं है कि भारत को संवेदनशील तकनीक का हस्तांतरण किया जा रहा है। इसका ताल्लुक बाजार से है। भारत सरकार भारतीय प्रक्षेपण यानों के लिए सब्सिडी देती है। यह इतनी भी नहीं होनी चाहिए कि इससे इस क्षेत्र की अन्य कंपनियों के अस्तित्व पर असर पड़े।

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