सौरव दास-आशुतोष रांका ने हाईकोर्ट से याचिका वापस ली, बॉन्ड तोड़ने पर कोर्ट की टिप्पणी
(DELHI, DELHI) कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका ने न्यायिक हिरासत बढ़ाने के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिकाएं वापस ले ली हैं। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि दोनों नेताओं ने बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया और बैरिकेड तोड़ा। अदालत ने उन्हें मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने के लिए रिवीजन पिटीशन दाखिल करने का विकल्प अपनाने को कहा।

क्या है पूरा मामला?

10 अक्टूबर को प्रदर्शन से पहले सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में लिया गया था। बाद में उन्हें शांति भंग नहीं करने की शर्त पर जमानत मिली। 12 अक्टूबर को सरकार ने जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया। इसके बावजूद 13 अक्टूबर को दोनों नेता तिरंगा लेकर जंतर-मंतर पहुंचे, जहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

14 अक्टूबर को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा। 19 अक्टूबर को हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद उनकी कस्टडी दो दिन के लिए बढ़ा दी गई। इसी आदेश को चुनौती देते हुए दोनों ने हाईकोर्ट का रुख किया था।

हाईकोर्ट ने रिवीजन पिटीशन दाखिल करने को क्यों कहा?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सवाल किया कि जब मजिस्ट्रेट के आदेश को चुनौती देने के लिए रिवीजन पिटीशन का विकल्प उपलब्ध है, तो सीधे संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत याचिका क्यों दायर की गई। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को मौजूदा याचिका वापस लेकर उचित कानूनी विकल्प अपनाने को कहा। इसके बाद दोनों नेताओं ने अपनी याचिकाएं वापस ले लीं।

सुनवाई के दौरान कोर्ट की अहम टिप्पणियां

बॉन्ड की शर्तों पर सवाल: कोर्ट ने कहा कि दोनों नेताओं ने शांति बनाए रखने का बॉन्ड दिया था। यदि बॉन्ड के उल्लंघन की आशंका सही साबित होती है, तो अधिकारियों की कार्रवाई को गलत कैसे कहा जा सकता है?

बैरिकेड तोड़ने पर चिंता: अदालत ने कहा कि बैरिकेड पार करने पर समूह के अन्य लोगों के शामिल होने और स्थिति बिगड़ने की आशंका हो सकती है।

उम्र और संगठन को लेकर सवाल: वकील ने एक नेता की उम्र 27 साल और दूसरे की 31 साल बताई। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की, ‘ये जेन-जी नहीं हैं।’ अदालत ने उनसे उनके संगठन और उसके उद्देश्य के बारे में भी पूछा।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति: कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण रखना था, तो पुलिस से अनुमति ली जा सकती थी। इससे माहौल बिगाड़ने वाले लोगों को रोकने में मदद मिल सकती थी।

जंतर-मंतर जाने पर सवाल: अदालत ने पूछा कि जब जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाया गया था, तो दोनों वहां क्यों गए। कोर्ट ने यह भी कहा कि संबंधित अधिसूचना पर रोक नहीं लगी थी और मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

किन वकीलों ने की पैरवी?

सुनवाई जस्टिस सुब्रमोनियम प्रसाद की अदालत में हुई। सौरव दास और आशुतोष रांका की ओर से एडवोकेट अभिक चिमनी ने दलीलें रखीं। दिल्ली पुलिस की तरफ से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा और CGSC आशीष दीक्षित पेश हुए।

दोनों मामले क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर

दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से जुड़े मामले को भी क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। इससे पहले कनॉट प्लेस में दर्ज केस क्राइम ब्रांच को ट्रांसफर किया गया था। अब दोनों मामलों की जांच क्राइम ब्रांच करेगी।

कॉकरोच जनता पार्टी ने 36 दिन किया था प्रदर्शन

कॉकरोच जनता पार्टी ने NEET पेपर लीक मामले में तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 20 जून से 25 जुलाई तक प्रदर्शन किया था। 36 दिन चले इस प्रदर्शन के दौरान एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक भी भूख हड़ताल पर बैठे थे।

20 जुलाई को पार्टी ने संसद तक मार्च भी निकाला था। 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा प्रदर्शन समाप्त हो गया था।

Digital Desk: Prashant Kumar Singh

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