गंगा एक्सप्रेसवे से ट्रांसपोर्ट और टूरिज्म कारोबार को रफ्तार, सफर के समय में बड़ी बचत
(Lucknow, Lucknow) उत्तर प्रदेश में गंगा एक्सप्रेसवे बेहतर कनेक्टिविटी के साथ परिवहन, पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों को गति देने का माध्यम बन रहा है। मेरठ से प्रयागराज तक करीब 594 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे से ट्रांसपोर्टरों और टूर-ट्रैवल ऑपरेटरों को सफर के समय और ईंधन की बचत का लाभ मिलने की बात सामने आई है। जाम से राहत और समय पर डिलीवरी की सुविधा से कारोबारियों को भी फायदा हो रहा है।


मेरठ के गुडलक ट्रांसपोर्ट के संचालक शिव कुमार यादव के अनुसार, गंगा एक्सप्रेसवे से पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच माल ढुलाई आसान हुई है। ट्रकों की निर्बाध आवाजाही से ईंधन खर्च और परिचालन लागत में बचत हो रही है। समय पर माल पहुंचने से व्यापारियों का भरोसा भी बढ़ा है।

सहारनपुर के उपकार ट्रांसपोर्ट के मालिक अमित शर्मा ने बताया कि पहले सहारनपुर से प्रयागराज तक माल पहुंचाने में 20 से 22 घंटे लगते थे, जबकि अब यह यात्रा करीब 11 से 12 घंटे में पूरी हो रही है। उनके अनुसार, टोल टैक्स देने के बावजूद समय और ईंधन की बचत से कुल परिवहन लागत में कमी आ रही है।

एक्सप्रेसवे से टैक्सी, कैब और टूर पैकेज संचालकों के लिए भी नए अवसर बने हैं। मेरठ के ज्योति टूर एंड ट्रैवल के संचालक मूलक सिंह के मुताबिक, प्रयागराज और पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले यात्रियों का सफर आसान हुआ है। कम समय में लंबी दूरी तय होने से धार्मिक यात्राओं, पारिवारिक टूर और समूह यात्राओं के विकल्प बढ़े हैं।

सहारनपुर के ट्रैवल कारोबारी अमित गुप्ता ने बताया कि पहले सहारनपुर से प्रयागराज तक कार या मिनी बस से पहुंचने में 16 से 17 घंटे लगते थे, जबकि अब करीब 10 घंटे में यात्रा पूरी हो जाती है। वहीं, मेरठ से प्रयागराज का सफर पहले 10 से 12 घंटे का था, जो अब लगभग 6 घंटे में पूरा हो रहा है। उनके अनुसार, इससे वाहन बुकिंग बढ़ने के साथ मेंटेनेंस खर्च में भी बचत हो रही है।


करीब 594 किलोमीटर लंबा छह लेन का एक्सेस-कंट्रोल्ड गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज को जोड़ता है। इसे भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित करने की संभावना भी रखी गई है।

बेहतर सड़क संपर्क से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक केंद्रों तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश के कृषि एवं व्यावसायिक क्षेत्रों के बीच आवाजाही आसान होने की उम्मीद है। इससे परिवहन, भंडारण, प्रसंस्करण और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

एक्सप्रेसवे से कृषि उत्पादों को मंडियों, प्रसंस्करण इकाइयों और उपभोक्ता बाजारों तक पहुंचाने में सुविधा मिलने की संभावना है। फल, सब्जियों और जल्दी खराब होने वाले उत्पादों की तेज ढुलाई से आपूर्ति में लगने वाला समय घट सकता है।

औद्योगिक क्षेत्र में भी कच्चे माल की आपूर्ति और तैयार उत्पादों की ढुलाई अधिक सुविधाजनक हो सकती है। इससे कारोबारियों को बड़े बाजारों तक पहुंचने और आपूर्ति व्यवस्था बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

गंगा एक्सप्रेसवे के साथ करीब 2,635 हेक्टेयर क्षेत्र में एकीकृत विनिर्माण एवं लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर विकसित करने की परिकल्पना है। इसका उद्देश्य सड़क संपर्क को औद्योगिक निवेश, गोदामों, माल प्रबंधन और विनिर्माण गतिविधियों से जोड़ना है।

इन परियोजनाओं के विकसित होने से स्थानीय स्तर पर रोजगार, सहायक कारोबार और सेवा क्षेत्र के विस्तार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

प्रयागराज जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहर तक तेज पहुंच से पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सकता है। मार्ग के आसपास होटल, भोजनालय, वाहन मरम्मत केंद्र और परिवहन सेवाओं की मांग बढ़ने की भी संभावना है। शाहजहांपुर में 3.5 किलोमीटर लंबी आपातकालीन हवाई पट्टी भी इस परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है।

इस तरह गंगा एक्सप्रेसवे को सड़क संपर्क के साथ व्यापार, कृषि, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन के विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है।

Digital Desk: Liza Chandel

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