तिब्बत भूकंप के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल है। यहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल के कारण भूकंपीय गतिविधियां होती रहती हैं। इन्हीं प्लेटों के टकराव से हिमालय पर्वत का निर्माण हुआ है।
जनवरी 2025 में तिब्बत के तिंगरी काउंटी में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, इस आपदा में तिब्बत में करीब 400 लोगों की मौत हुई थी, जबकि पड़ोसी नेपाल में 13 लोगों की जान गई थी। इसके झटके उत्तर भारत सहित दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में महसूस किए गए थे।
इससे पहले 2010 में चीन के पड़ोसी प्रांत छिंगहाई के युशू क्षेत्र में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। उस आपदा में कम से कम 2,698 लोगों की मौत हुई थी और करीब 300 लोग लापता हो गए थे।
तिब्बत में इस साल 26 अगस्त को नेपाल सीमा के पास पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया था। इससे नदी का रास्ता कुछ समय के लिए बाधित हो गया। बाद में पानी का तेज बहाव नेपाल की ओर बढ़ा, जिससे कई गांवों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचा।
चीन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में इस आपदा में 43 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 519 लोग लापता बताए गए थे। नेपाल में बाढ़ से 1,455 लोगों की मौत और 5,285 लोगों के लापता होने की जानकारी दी गई थी।
तिब्बत और हिमालय के आसपास का क्षेत्र भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच भूगर्भीय गतिविधियों से प्रभावित होता है। प्लेटों के आपसी दबाव और हलचल के कारण यहां भूकंप आने का खतरा बना रहता है। क्षेत्र में पहले आए बड़े भूकंप और प्राकृतिक आपदाएं इसकी संवेदनशीलता को दर्शाती हैं।
Digital Desk: Liza Chandel
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