(India)
उद्धव ठाकरे के हाथ से शिव सेना का नाम और पार्टी का चुनाव चिन्ह छिन जाने के बाद इस वक्त ये सवाल उठ रहा है कि क्या महाराष्ट्र में उनकी राजनीति यहीं खत्म हो जाएगी? क्या उद्धव ने कांग्रेस-एनसीपी के साथ जाकर और महाविकास अघाड़ी सरकार बनाकर शिवसेना के हिन्दुत्व के एजेंडा को कमजोर किया है? कई सवाल हैं जो लोगों के मन में हैं. एकनाथ शिंदे के बागी तेवर होने और उसके बाद पार्टी तोड़कर बीजेपी के सहारे महाराष्ट्र की सत्ता में आने के बाद जरूर उद्धव ठाकरे के कैडर निराश और हताश हैं. लेकिन ऐसा भी नहीं है कि उद्धव काफी कमजोर हो गए हों.
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