पर्यटन विभाग अब इस बस के लिए एक सुरक्षित और आकर्षक मार्ग तय करने में जुटा है। पेड़ों की ऊंचाई से लेकर ओवरहेड केबल तक, हर तकनीकी पहलू की जांच चल रही है ताकि यात्रियों को स्मूथ और सुरक्षित अनुभव मिल सके। यह बस पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में आई थी, लेकिन शहर के नेटवर्क में इसके संचालन को लेकर बार-बार चुनौतियाँ सामने आईं। डबल-डेकर बसों का इतिहास दिल्ली में लंबा रहा है, हालांकि 1989 के बाद ये धीरे-धीरे गायब हो गईं। अब यह इलेक्ट्रिक वर्ज़न फिर से राजधानी की पहचान बनने जा रहा है, हालांकि फिलहाल सिर्फ पर्यटन रूट पर, और सीमित ट्रिप्स के साथ।
Author: JAN TV Editorial Team
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