सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी: राज्यपाल विधानसभा से पास बिलों को लंबित न रखें
(India) सुप्रीम कोर्ट ने राज्यपालों द्वारा विधानसभा से पारित विधेयकों को लंबे समय तक लंबित रखने पर गंभीर टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि राज्यपाल के पास किसी भी बिल पर निर्णय लेने के लिए तीन संवैधानिक विकल्प हैं—उसे मंजूरी देना, उसे पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस भेजना, या उसे राष्ट्रपति के पास भेजना। लेकिन वे किसी भी स्थिति में बिलों को अनिश्चितकाल तक रोककर नहीं रख सकते।

पीठ ने साफ़ किया कि संविधान में इसका कोई ठोस समय-सीमा निर्धारित नहीं है, फिर भी किसी भी प्रकार की “अव्यावहारिक या अनुचित देरी” न्यायिक हस्तक्षेप का आधार बन सकती है। अदालत का कहना है कि विधायी प्रक्रिया को रोककर रखना शासन व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

यह टिप्पणी हाल ही में कई राज्यों में राज्यपाल और सरकारों के बीच बढ़ते विवादों की पृष्ठभूमि में आई है, जहाँ विधेयक मंजूरी के लिए लंबे समय से लंबित बताए जा रहे थे। सुप्रीम कोर्ट ने जोर दिया कि संवैधानिक पदों पर बैठी संस्थाओं को पारदर्शिता और समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

Author: JAN TV Editorial Team

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।