जजों ने टिप्पणी की कि मौजूदा सिस्टम प्रभावी नहीं है और कंटेंट मॉनिटरिंग में भारी देरी होती है। कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया कि वह चार हफ्तों के भीतर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए स्पष्ट और सख्त रेगुलेशन तैयार करे, जिससे अश्लील कंटेंट को रोकने की प्रक्रिया तेज़ और प्रभावी हो सके।
सरकार से यह भी पूछा गया कि अब तक इस दिशा में ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इंटरनेट पर उपलब्ध कंटेंट का प्रभाव सीधे समाज और बच्चों पर पड़ता है, इसलिए इस मुद्दे को गंभीरता से लेना आवश्यक है।
Author: JAN TV Editorial Team
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