डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि पहले इस योजना में केंद्र और राज्य का फंडिंग अनुपात 90:10 था, जिसे बदलकर 60:40 कर दिया गया है। उनके मुताबिक, इससे राज्यों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और योजना का असर कमजोर होगा। उन्होंने कहा कि यह बदलाव मनरेगा का “गला घोंटने” जैसा है। शिवकुमार ने यह भी याद दिलाया कि उनके विधानसभा क्षेत्र कनकपुरा में नरेगा का प्रयोग सबसे पहले किया गया था, जहां बाद में बेवजह जांच और आरोप लगाए गए।
डिप्टी सीएम ने आगे कहा कि इस नए कानून से पंचायती राज व्यवस्था में असमंजस और चिंता का माहौल है। उनका कहना है कि पहले मजदूरी सीधे लाभार्थियों के खाते में जाती थी, लेकिन अब प्रक्रिया को जटिल बनाया जा रहा है। शिवकुमार ने इसे भाजपा के अंत की शुरुआत बताते हुए कहा कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर लड़ाई लड़ेगी और ग्राम पंचायतों के अधिकारों की रक्षा करेगी।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।