यूपी में 99.86% रियल टाइम खतौनी व्यवस्था पूरी, 65 लाख वरासत ऑनलाइन दर्ज
(UTTARPRADESH, UTTARPRADESH) उत्तर प्रदेश में भूमि अभिलेखों को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में राजस्व विभाग ने महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की है। सरकार के मुताबिक, प्रदेश में रियल टाइम खतौनी व्यवस्था का 99.86 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा 65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन दर्ज की गई हैं, जबकि 85 प्रतिशत से अधिक गाटों में अंश निर्धारण का कार्य पूरा हो चुका है।

राजस्व विभाग की इन पहलों का उद्देश्य जमीन से जुड़े रिकॉर्ड को अपडेट रखना, दस्तावेजों के सत्यापन को आसान बनाना और नागरिकों को राजस्व सेवाओं के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत देना है।

खतौनी व्यवस्था में डिजिटल बदलाव

राजस्व विभाग के अनुसार, वर्ष 2017 से पहले खतौनी का निर्माण छह वर्ष के रोस्टर के आधार पर होता था। अब रियल टाइम खतौनी व्यवस्था लागू की गई है, जिसका 99.86 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। इसके साथ ही क्यूआर कोड और डिजिटल हस्ताक्षर वाली खतौनी तैयार करने की पहल की गई है, जिससे भूमि रिकॉर्ड की प्रामाणिकता जांचने में मदद मिल सकती है।

65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन

भूमि स्वामी की मृत्यु के बाद उत्तराधिकारियों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, अब तक 65 लाख से अधिक वरासत ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। पहले यह प्रक्रिया ऑफलाइन होती थी, जिसमें लोगों को समय और श्रम खर्च करना पड़ता था।

98 प्रतिशत भू-नक्शे खतौनी से लिंक

भूमि रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के लिए अंश निर्धारण का काम भी आगे बढ़ाया गया है। विभाग के अनुसार, 85 प्रतिशत से अधिक गाटों में अंश निर्धारण पूरा हो चुका है। उपलब्ध भू-नक्शों और शजरों का 100 प्रतिशत डिजिटलीकरण किया गया है, जबकि 98 प्रतिशत भू-नक्शों को खतौनी से जोड़ दिया गया है।

इससे भूमि संबंधी रिकॉर्ड और नक्शों के बीच डिजिटल संबंध स्थापित करने में मदद मिली है।

ई-खसरा पड़ताल ऐप से डिजिटल रिकॉर्ड

वर्ष 2021 से ई-खसरा पड़ताल ऐप के माध्यम से डिजिटल खसरा तैयार करने का काम किया जा रहा है। इस व्यवस्था के जरिए खेतों से संबंधित विवरण डिजिटल रूप में दर्ज किए जा रहे हैं।

राजस्व सेवाओं के डिजिटलीकरण से भूमि अभिलेखों को अधिक सुलभ और व्यवस्थित बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। रियल टाइम खतौनी, ऑनलाइन वरासत और डिजिटल भू-नक्शे इस बदलाव के प्रमुख हिस्से हैं।

Digital Desk: Prashant Kumar Singh

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