‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की दिखी झलक
महोत्सव की थीम ‘विविध भारत: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ाव’ रही। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को भारत की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना और उसके संरक्षण में युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना था। कार्यक्रम में युवाओं ने इस विचार पर जोर दिया कि पूजा पद्धतियां और भाषाएं अलग हो सकती हैं, लेकिन साझा भावनाएं लोगों को एकजुट करती हैं।
सनातन संस्कृति और युवा शक्ति पर चर्चा
कार्यक्रम के वैचारिक सत्रों में सनातन परंपरा के वैज्ञानिक आधार, भारतीय संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता, आध्यात्मिक ज्ञान और राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हुई।
इस दौरान संत बालकानंद गिरि जी महाराज, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विष्णु जैन, साध्वी डॉ. शिवानी भारती और काजल हिंदुस्तानी ने युवाओं से संवाद किया। वक्ताओं ने सनातन संस्कृति की तार्किकता, सांस्कृतिक पहचान और युवा शक्ति पर अपने विचार रखे। साथ ही, वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश में सांस्कृतिक गतिविधियों, धार्मिक पर्यटन और विरासत संरक्षण के क्षेत्र में हुए बदलावों पर भी चर्चा की गई।
लोक नृत्य और भक्ति संगीत ने बांधा समां
महोत्सव के सांस्कृतिक मंच पर लोक नृत्य, कथक, भरतनाट्यम, भक्ति संगीत और नाट्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया। मां दुर्गा को समर्पित विशेष नृत्य प्रस्तुति भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रही।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हुए सांस्कृतिक बदलावों पर आधारित विशेष गीत और दृश्य प्रस्तुति को भी दर्शकों की सराहना मिली।
केशवम बैंड की म्यूजिकल नाइट के साथ समापन
महोत्सव का समापन केशवम बैंड की ग्रैंड म्यूजिकल नाइट के साथ हुआ। आधुनिक संगीत और भजनों के संगम ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं में उत्साह भर दिया। आयोजन में सांस्कृतिक विरासत से जुड़ाव, आध्यात्मिक अभिव्यक्ति और युवा सहभागिता प्रमुख रूप से देखने को मिली।
Digital Desk: Prashant Kumar Singh
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