इन कार्यक्रमों का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि की कालजयी रचना ‘रामायण’ के संदेश, भारतीय सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक समरसता के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाना है।
75 जिलों में रामायण पाठ और दीपदान
वाल्मीकि जयंती पर उत्तर प्रदेश के सभी जिलों में मंदिरों और महर्षि वाल्मीकि से जुड़े स्थलों पर दीप प्रज्ज्वलन, दीपदान और रामायण पाठ कराया जाएगा। कार्यक्रम जनपद, तहसील और विकासखंड स्तर पर आयोजित होंगे।
आयोजनों में पूजन-हवन के साथ लव-कुश प्रसंग और अन्य सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी शामिल होंगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्यक्रम स्थलों पर साफ-सफाई, पेयजल, ध्वनि, प्रकाश और सुरक्षा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
तुलसीदास आश्रम राजापुर (चित्रकूट), वाल्मीकि आश्रम बिठूर (कानपुर), वाल्मीकि आश्रम श्रावस्ती, अयोध्या और प्रयागराज समेत कई स्थानों पर कार्यक्रम होंगे।
चित्रकूट के लालापुर में होगा मुख्य आयोजन
महर्षि वाल्मीकि की तपोस्थली लालापुर में जिला प्रशासन की ओर से वृहद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। चित्रकूट के क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डीके शर्मा के अनुसार, यहां रामलीला मंचन, वाल्मीकि रामायण पाठ, भजन संध्या और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां होंगी।
कार्यक्रम के दौरान नदी के घाट पर वाल्मीकि आरती भी आयोजित की जाएगी। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
स्थानीय कलाकारों को मिलेगा मंच
वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रमों में स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर दिया जाएगा। जिलाधिकारियों की अध्यक्षता में गठित समितियां चयनित मंदिरों और स्थलों पर प्रस्तुतियों के लिए कलाकारों का चयन करेंगी।
कार्यक्रमों का समन्वय संस्कृति विभाग, सूचना एवं जनसंपर्क विभाग तथा जिला पर्यटन एवं संस्कृति परिषद के माध्यम से किया जाएगा। प्रत्येक जिले में आयोजन के लिए नोडल अधिकारी भी नामित किए गए हैं। सरकार ने कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
पिछले साल 600 से अधिक मंदिरों में हुए थे आयोजन
संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, पिछले वर्ष प्रदेश के 600 से अधिक मंदिरों में महर्षि वाल्मीकि जयंती के कार्यक्रम आयोजित किए गए थे। इस वर्ष भी व्यापक स्तर पर आयोजन की तैयारी है।
मंत्री ने बताया कि मंदिरों में दीप प्रज्ज्वलन और दीपदान के साथ आठ, 12 या 24 घंटे तक लगातार वाल्मीकि रामायण पाठ कराने की व्यवस्था की जाएगी। श्रीराम, हनुमान और रामायण से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण मंदिरों में भी भजन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
रामायण की विरासत को जन-जन तक पहुंचाने की पहल
वाल्मीकि जयंती के अवसर पर होने वाले ये आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की पहचान को सामने लाने के साथ स्थानीय कलाकारों को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित हैं। रामायण पाठ, लव-कुश प्रसंग, रामलीला और भजन संध्या के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर प्रस्तुत किया जाएगा।
Digital Desk: Prashant Kumar Singh
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।