जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं, मंडप सज चुके हैं, शामियाने तन चुके हैं। भारत के सबसे बड़े साहित्य संगम के तौर पर पहचाने जाने वाले जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का आज से आगाज हो रहा है। मगर इस बार इस शब्द कुंभ में शरीक होने वाले विवादों में भी डुबकी लगाने को तैयार रहें। साहित्य के इस आयोजन में असहिष्णुता के मुद्दे पर छिड़ी देशव्यापी बहस की छाया पड़ना तय दिख रहा है। आयोजकों की ओर से आमंत्रित वक्ताओं की लिस्ट में जहां साहित्य अकादमी अवार्ड लौटाने वाले तीन साहित्यकारों समेत कई ऐसे नाम हैं जो असहिष्णुता का झंडा उठाए चल रहे हैं, वहीं इस सूची में उनके भी नाम हैं जो इस मुद्दे पर अवार्ड वापसी और बयानों का मुखर विरोध कर चुके हैं। इस बार फेस्टिवल में एक बदलाव भी होगा। दुनिया के सबसे बड़े फ्री लिटरेचर फेस्टिवल के रूप में प्रचारित उत्सव में ऑन ग्राउंड रजिस्ट्रेशन पर 100 रुपए की एंट्री फीस ली जाएगी। हालांकि ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन पर एंट्री फ्री रहेगी। लिटरेचर फेस्टिवल है, सो साहित्य की चर्चा तो होगी ही। लेकिन कब किस कोने में, किस मंच से विवादों की चिंगारी भड़क उठे बता पाना मुश्किल है। शरीक होने वाले वक्ताओं में इस विवाद के दोनों पहलुओं से जुड़े बड़े नामों से हम आपको आज ही रू-ब-रू करवा रहे हैं। नजर रखिएगा, शब्दों के बाण कोई भी छोड़ सकता है।
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