जवाहरकला केंद्र  में खेले गए तीन लघु नाटक
(India) जयपुर- संस्कार - इसनाटक में रोजमर्रा काम आने वाले उपकरणों, वस्तुओं और इंसानों के बीच आपसी रिश्तों को दर्शाया गया है। किसी चीज से इंसान को कितना भी प्यार रहा हो पर एक समय वह उसे बेकार समझ कर फेंक देता है।
लाख की नाक - इसनाटक में मान-सम्मान की प्रतीक नाक के बारे में बताया गया है। आम इंसान हो या राजा-महाराजा, मान-सम्मान की बात आती है तो सभी के लिए अपनी नाक महत्वपूर्ण हो जाती है। हर किसी को नाक कटने या अपनी इज्जत के धूमिल होने का भय सताता है। यही इस नाटक में दिखाया गया।

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।