तंजौर कला 1600 ईस्वी की प्राचीन कला का स्वरूप है
(India) सोल म्यूजिक हो या महावीर, मर्यादा पुरुषोत्तम हों या माखन चोर, सोने की सुनहरी चमक के साथ खूबसूरत कलाकृतियों में स्पिरिचुएलिटी का समावेश। कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला शुक्रवार क जवाहर कला केन्द्र की आर्ट गैलरी में जहां आर्टिस्ट आकांक्षा गुप्ता की तनजौर आर्ट एग्जीबिट की गई। तनजोर आर्ट के माध्यम से आर्टिस्ट ने स्प्रिचुअल थॉट को बखूबी अपनी कलाकृति के माध्यम से दर्शाया है। मूल रूप से दिल्ली निवासी आंकाक्षा ने बताया तंजौर कला 1600 ईस्वी की प्राचीन कला का स्वरूप है। कला के इस रूप का नाम तंजवार अथवा तंजौर शहर के नाम पर पड़ा है। अपनी सौ कलाकृतियों के माध्यम से उन्होंने भगवान के विभिन्‍न स्वरूप को दर्शाया है जिसमें कहीं भगवान गणेश तो कहीं महावीर,कहीं सरस्वती तो कहीं मर्यादा पुरुषोत्तम राम को दर्शाया है। इन सभी कलाकृतियों को अलग अलग टाइटल के साथ प्रस्तुत किया गया है। इन कलाकृतियों में गोल्ड के साथ साथ सेमी प्रिशियस स्टोन को भी बड़ी ही सुंदरता के साथ उभारा गया है। यह एग्जीबिशन सात सितम्बर तक चलेगी।

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