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सागर को सबसे ज्यादा लोकप्रियता उनके टीवी सीरियल "रामायण" से मिली। रामानंद सागर का असली नाम चंद्रमौली था। उन्होंने इंडस्ट्री में आने से पहले कई तरह की नौकरी की। सागर दिन में चपरासी, ट्रक क्लीनर, साबुन विक्रेता के रूप में काम करते थे और रात में पढ़ाई करते थे। वह संस्कृत और फारसी में गोल्ड मैडेलिस्ट है। सागर ने कई कहानियां, नोवल, कविताएं और प्ले लिखे। उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत साइलेंट फिल्म में क्लेपर ब्वॉय के रूप में की। 1940 में उन्होंने पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थिएटर में एसीटेंट स्टेज मैनेजर का काम किया और कुछ प्ले भी डायरेक्ट किए। 1950 में सागर ने एक फिल्म और टेलीविजन प्रोडेक्शन कंपनी "सागर फिल्म्स (प्राइवेट लिमिटेड)" (सागर आर्ट्स) स्थापित की। उन्हें दिलीप कुमार, वैजयंतीमाला और राजकुमार स्टारर फिल्म "पैगाम" के लिए फिल्मफेयर बेस्ट डायलॉग अवॉर्ड मिली। फिल्म "आंखे" के लिए वह फिल्मफेयर बेस्ट डायरेक्टर अवॉर्ड से नवाजे गए। बाद में सागर ने टीवी की तरफ रूख किया। उन्होंने कई ऎतिहासिक सीरियल्स बनाएं। इसमें "रामायण" ने इतिहास रच दिया। ये सीरियल लोगों में बहुत लोकप्रिय हुआ। उन्होंने "कृष्णा", "लव कुश", "विक्रम और बेताल" और "अलिफ लैला" जैसा हिट सीरियल्स भी बनाए। 12 दिसंबर, 2005 को सागर का निधन हो गया।
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