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गणेश चतुर्थी 14 सितंबर यानी भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान गणेश जी का जन्म हुआ था। महाराष्ट्र में इस पर्व को 10 दिनों तक बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।
हिंदू देवी-देवताओं का पूजन सुबह सूर्योदय के समय ही किया जाता है, लेकिन गणेश चतुर्थी के दिन ऐसा नहीं होता।
शास्त्रों के अनुसार, गणेश जी का जन्म भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को बुधवार के दिन दोपहर में हुआ था। इसी कारण गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त दोपहर में ही माना जाता है।
इस साल गणेश चतुर्थी की मूर्ति स्थापना का शुभ मुहूर्त-
इस साल भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी तिथि 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे से प्रारंभ हो रही है और 15 सितंबर को सुबह 7:44 बजे तक मान्य रहेगी।
14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का शुभ मुहूर्त सुबह 11:00 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक है।
गणेश जी प्रथम पूज्य कैसे कहलाने लगे?
मान्यता के अनुसार, माता पार्वती स्नान के लिए जा रही थीं। द्वार पर कोई नहीं था, तो माता पार्वती ने अपने मैल से एक मूर्ति बनाई और उसमें प्राण डाल दिए। उन्होंने उसे द्वार पर खड़ा कर दिया और कहा कि किसी को भी अंदर मत आने देना। यह कहकर माता पार्वती स्नान के लिए चली गईं।
बाल गणेश दरवाजे पर पहरा देने लगे। कुछ समय बाद भगवान शिव आए और अंदर जाने लगे, तो बाल गणेश ने उन्हें रोक लिया। देवों के देव महादेव किसी के रोकने से रुकने वाले नहीं थे। वे अंदर जाने की जिद पर अड़ गए।
बाल गणेश माता पार्वती का आदेश मानते हुए भगवान शिव को अंदर जाने से रोकने की जिद पर अड़ गए। महादेव को गुस्सा आ गया और उन्होंने अपने त्रिशूल से बाल गणेश का सिर धड़ से अलग कर दिया।
पार्वती जब स्नान करके बाहर आईं, तो उन्होंने बाल गणेश का सिर कटा हुआ देखा। यह देखकर वे रोने लगीं और उन्हें बहुत गुस्सा आया।
भगवान शिव को पता चला कि यह उनका ही पुत्र है, तो उन्हें पछतावा हुआ। वे पार्वती से माफी मांगने लगे और कहा कि मैं इसका सिर तो नहीं जोड़ सकता, लेकिन किसी और का सिर जोड़ सकता हूं।
महादेव ने अपने सिपाहियों से कहा कि जो भी मां अपने बच्चे को पीठ देकर सो रही हो, उस बच्चे का सिर काटकर ले आओ। कोई भी मां अपने बच्चे को पीठ देकर नहीं सो रही थी। लेकिन जंगल में एक हाथिनी अपने बच्चे को पीठ देकर सो रही थी। सिपाही उस हाथी के बच्चे का सिर काटकर ले आए और भगवान शिव को दे दिया।
भगवान शिव ने हाथी के बच्चे का सिर गणेश जी के धड़ पर लगाकर उन्हें जीवित कर दिया। इसके बाद भगवान शिव ने गणेश जी को वरदान दिया—आज से देवी-देवताओं में गणेश जी प्रथम पूज्य होंगे। घर बनाना हो या मंदिर, सबसे पहले गणेश जी की स्थापना और पूजा करने के बाद ही कोई शुभ काम शुरू होगा।
इस दिन के बाद से हिंदू धर्म में सभी देवी-देवताओं में गणेश जी प्रथम पूज्य हैं। नया घर बनाना हो या दुकान, हॉस्टल बनाना हो या मंदिर, सबसे पहले भगवान गणेश जी को ही विराजमान किया जाता है। विवाह का प्रथम निमंत्रण भी गणेश जी को ही दिया जाता है।
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