(India)
पत्तदकल बेंगलुरु से 514 किलोमीटर और चालुक्य वंश की राजधानी रहे बदामी नगर से 22 किलोमीटर दूर है। यहां चालुक्य वंश के राजाओं ने सातवीं और आठवीं शताब्दी में कई मंदिर बनवाए थे। वहीं, कई मंदिर 2000 साल पुराने हैं। आज यहां नौ मंदिर और एक जैन धर्मशाला स्थित है। इनके चारों ओर कई चैत्य, पूजास्थल और ढेरों अधूरी आधारशिलाएं हैं। यहां चार मंदिर द्रविड़ शैली में और चार नागर शैली में बनाए गए हैं। वहीं पापनाथ मंदिर मिश्रित शैली में बनाया गया है। यहां के बलुआ पत्थर लाल आभा लिए हुए हैं, इसलिए इस नगर को कभी किसुवोलाल कहा जाता था। यूनेस्को ने इन मंदिरों को वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया है।
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