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बांग्लादेश इस समय गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। कई इलाकों में रोजाना कई घंटों तक बिजली कटौती हो रही है। बरिशाल के एक अस्पताल में बैकअप जनरेटर का डीजल खत्म होने के बाद मरीजों की देखभाल मोबाइल की टॉर्च की रोशनी में करनी पड़ी।
बिजली संकट का सबसे बड़ा कारण उत्पादन में कमी बताया जा रहा है। देश में इस समय करीब 3,000 से 3,500 मेगावाट बिजली की कमी है। अगस्त में औसतन करीब 13 हजार मेगावाट बिजली का उत्पादन हुआ, जबकि मांग लगभग 16 हजार मेगावाट थी।
बिजली उत्पादन के लिए जरूरी ईंधन की कमी ने भी संकट को गहरा दिया है। बांग्लादेश में कई गैस आधारित पावर प्लांट पूरी क्षमता से नहीं चल पा रहे हैं। 2024-25 में देश की करीब 44% बिजली गैस से बनी, लेकिन घरेलू गैस उत्पादन घटने के कारण गैस का आयात बढ़ाना पड़ा।
इसके अलावा LNG टर्मिनल में आई समस्या और कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के पूरी क्षमता से काम नहीं करने का भी असर बिजली उत्पादन पर पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में कोयले से चलने वाले कई संयंत्र उपलब्ध क्षमता के मुकाबले कम बिजली पैदा कर रहे हैं।
बिजली संकट का असर आम लोगों के साथ-साथ गारमेंट उद्योग पर भी पड़ा है। BKMEA के सर्वे के अनुसार, कई निटवेयर फैक्ट्रियों में ऑर्डर और उत्पादन प्रभावित हुआ है। मीटिंग, डाइंग और गारमेंट सिलाई के उत्पादन में भी कमी दर्ज की गई है।
देश के हिम्मतसिंह, बरिशाल, रंगपुर, सिलहट, राजशाही और खुलना जैसे इलाकों में कई जगह 3 से 10 घंटे तक बिजली कटौती की खबर है। बरिशाल जनरल अस्पताल में बिजली बार-बार जाने और जनरेटर के लिए डीजल खत्म होने के बाद स्वास्थ्यकर्मियों को मोबाइल टॉर्च की रोशनी में मरीजों की देखभाल करनी पड़ी।
सरकार और विपक्ष के बीच बिजली संकट को लेकर आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं। सरकार ने पिछली अवामी लीग सरकार की नीतियों को संकट के लिए जिम्मेदार बताया है, जबकि विपक्ष ने मौजूदा सरकार पर संकट से निपटने में कुप्रबंधन और देरी के आरोप लगाए हैं।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश का मौजूदा बिजली संकट केवल बिजली उत्पादन की कमी तक सीमित नहीं है। गैस की कमी, महंगा आयात, बिजली संयंत्रों की तकनीकी समस्याएं और ईंधन की उपलब्धता जैसे कई कारण मिलकर स्थिति को प्रभावित कर रहे हैं।
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