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> ऑस्ट्रेलिया में दशकों बाद लौटा संक्रमण
ऑस्ट्रेलिया में करीब 50 वर्षों के बाद डिप्थीरिया (Diphtheria) का गंभीर प्रकोप देखा जा रहा है, जिसने वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों में सांस से संबंधित डिप्थीरिया के 17 और त्वचा को प्रभावित करने वाले 'क्यूटेनियस डिप्थीरिया' के 60 से अधिक मामले सामने आए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 महामारी के दौरान नियमित टीकाकरण (डीपीटी वैक्सीन) की दरों में आई गिरावट इस बीमारी की वापसी का मुख्य कारण है। इस संक्रमण की चपेट में 4 साल के बच्चों से लेकर 74 साल तक के बुजुर्ग आ रहे हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि कमजोर इम्यूनिटी वाले हर आयु वर्ग को इससे खतरा है।
> लक्षण, प्रसार और बचाव के उपाय
'कोरिनेबैक्टीरियम डिप्थीरिया' नामक बैक्टीरिया से होने वाला यह संक्रमण खांसने, छींकने या संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से फैलता है। इसके शुरुआती लक्षण सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे होते हैं, लेकिन गंभीर होने पर गले में एक मोटी भूरी झिल्ली बन जाती है, जो सांस लेना मुश्किल कर देती है। यदि समय पर इलाज न मिले, तो यह बैक्टीरिया हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा सकता है और नसों में लकवा जैसी स्थिति पैदा कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने भारत जैसे देशों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है, क्योंकि यहाँ भी टीकाकरण की दर प्रभावित हुई है। बचाव का एकमात्र और सबसे प्रभावी रास्ता समय पर 'डीपीटी' का टीका लगवाना और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना है।
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