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फाइबर की कमी के संकेत और स्वास्थ्य पर असर
अच्छी सेहत के लिए केवल प्रोटीन ही नहीं, बल्कि फाइबर भी एक अनिवार्य पोषक तत्व है। डायटीशियन श्वेता गर्ग के अनुसार, फाइबर हमारे शरीर के लिए 'क्लीिनिंग सिस्टम' की तरह काम करता है। यदि आपकी डाइट में प्रोसेस्ड और रिफाइंड फूड की मात्रा अधिक है, तो शरीर में फाइबर की कमी हो सकती है। इसकी कमी का सबसे प्रमुख लक्षण कब्ज और पाचन में गड़बड़ी है। इसके अलावा, बार-बार पेट फूलना (Bloating), गैस, एसिडिटी और ब्लड शुगर का तेजी से बढ़ना भी फाइबर की कमी के संकेत हैं। फाइबर की कमी से शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है, जिससे भविष्य में हृदय रोगों और कमजोर इम्यूनिटी का खतरा पैदा होता है।
- रोजाना की जरूरत और फाइबर के प्राकृतिक स्रोत
एक स्वस्थ वयस्क को प्रतिदिन लगभग 25-35 ग्राम फाइबर की आवश्यकता होती है। इसकी पूर्ति के लिए किसी महंगे सप्लीमेंट के बजाय दैनिक आहार में छोटे बदलाव पर्याप्त हैं। फाइबर के बेहतरीन स्रोतों में साबुत अनाज (ओट्स, दलिया, ब्राउन राइस), दालें, राजमा और चिया सीड्स शामिल हैं। फलों में सेब, अमरूद और पपीता का सेवन छिलके सहित करना अधिक फायदेमंद होता है, क्योंकि फलों के जूस के मुकाबले साबुत फल में फाइबर की मात्रा अधिक होती है। साथ ही, हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, ब्रोकली और गाजर को नियमित डाइट का हिस्सा बनाएं। ध्यान रहे, फाइबर को शरीर में सही ढंग से काम करने के लिए भरपूर पानी पीना भी बेहद जरूरी है।
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