(Lucknow, Lucknow)
उत्तर प्रदेश में जेलों को आधुनिक, सुरक्षित और मानवीय बनाने के लिए जेल अवसंरचना के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। बढ़ती बंदी संख्या और जेलों में ओवरक्राउडिंग की समस्या को कम करने के लिए नई जेलों के निर्माण और क्षमता विस्तार की प्रक्रिया जारी है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2017 में प्रदेश की 70 जेलों की कुल बंदी क्षमता 58,400 थी, जो वर्ष 2026 में बढ़कर 77,673 हो गई है। इसी अवधि में ओवरक्राउडिंग दर 1.77 से घटकर 1.03 रह गई।
वर्तमान में प्रदेश में कुल 77 कारागार संचालित हैं। इनमें 7 केंद्रीय कारागार, 2 महिला केंद्रीय कारागार, 64 जिला कारागार, 1 विशेष कारागार, 2 उप कारागार और 1 किशोर सदन शामिल हैं। वर्ष 2017 के बाद से अब तक सात नई जेलों का संचालन शुरू किया गया है। इनमें चित्रकूट, अंबेडकरनगर, संतकबीरनगर, इटावा केंद्रीय कारागार, प्रयागराज, श्रावस्ती और पुरानी जिला कारागार बरेली शामिल हैं। इन नई जेलों से कुल 10,495 बंदियों की अतिरिक्त क्षमता विकसित हुई है।
प्रदेश में छह और नई जिला जेलों के निर्माण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। प्रस्तावित जेलों में कानपुर नगर की क्षमता 2,030, औरैया की 1,056, शाहजहांपुर की 1,520, ज्ञानपुर-भदोही की 574, मुरादाबाद की 2,000 और ललितपुर की 552 बंदियों की क्षमता होगी। इन छह जेलों से कुल 7,732 अतिरिक्त बंदियों की क्षमता विकसित होने की बात कही गई है। इन परियोजनाओं के लिए प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है।
इसके अलावा अमेठी और महोबा में नई जिला जेलों का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। अमेठी जेल का निर्माण 98 प्रतिशत से अधिक और महोबा जेल का निर्माण 93 प्रतिशत से अधिक पूरा होने की जानकारी दी गई है। हाथरस, कुशीनगर, जौनपुर और हापुड़ में भी नई जेलों का निर्माण तेजी से जारी है। इन छह निर्माणाधीन जेलों की कुल क्षमता 6,156 बंदियों की होगी।
जेल अवसंरचना के विस्तार के साथ संभल, शामली, बलिया, सहारनपुर, अमरोहा और चंदौली में प्रस्तावित नई जेलों के लिए भूमि अधिग्रहण, भूमि क्रय और पंजीकरण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है। कई परियोजनाओं के लिए शासन स्तर पर धनराशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी दी गई है।
जेलों में अत्यधिक भीड़ का असर सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और सुधारात्मक गतिविधियों पर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए नई जेलों के निर्माण के साथ पुराने कारागारों के उन्नयन, अतिरिक्त बैरकों के निर्माण और आधुनिक सुरक्षा संसाधनों की उपलब्धता पर भी जोर दिया जा रहा है। लक्ष्य है कि बंदियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप आवासीय सुविधा मिले और जेलों में भीड़भाड़ से जुड़ी समस्याओं को कम किया जा सके।
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