अंग्रेजों ने 1857 में किया था क्रांतिकारियों का नरसंहार, अब मिला गंगा में मोक्ष
(India) उन्हेंं पंजाब के अजनाला में एक कुएं में फेंक दिया गया था। 157 साल तक गुरुद्वारा शहीद गंज एक कुएं ‘कालियां वाला खूह’ पर खड़ा था। स्थानीय इतिहासकारों की मदद से गुरुद्वारा कमेटी ने नई इमारत में गुरुद्वारा शिफ्ट किया। पुरानी इमारत को गिराया गया। उसके नीचे महीनों तक खुदाई चली। इसके बाद 282 क्रांतिकारियों के अवशेष और अस्थियां निकलीं। इन्हें गंगा में प्रवाहित करने का फैसला किया गया।
नरसंहार की अंग्रेजों ने बनाई थी योजना
अगस्त 1857 में अमृतसर के तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर फ्रेडरिक हैनरी कूपर और कर्नल जेम्स जॉर्ज ने इस नरसंहार की योजना बनाई थी। कूपर ने अपनी पुस्तक "द क्राइसिस ऑफ पंजाब" में भी इस घटना का उल्लेख किया है। नरसंहार में मारे गए क्रान्तिकारी अंग्रेजों की बंगाल नेटिव इन्फेंट्री से संबंद्ध थे, जिन्होंने बगावत कर दी थी। इनमें से अंग्रेजी सेनाओं ने 150 को गोली मार दी, जबकि 283 सिपाहियों को रस्सियों से बांध कर अजनाला लाया गया और इस कुएं में फेंक दिया गया था।

Author: Shiv Kishor

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